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स्टील प्लांट में संगठित चोरी का 24 घंटे में खुलासा, पांच आरोपी गिरफ्तार

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जेसीबी ऑपरेटर, लोडर चालक और ट्रेलर चालक की मिलीभगत से हुई थी लाखों की चोरी

9.08 लाख रुपये का माल और वाहन बरामद, संगठित अपराध की धारा भी जोड़ी गई

रायगढ़ । रायगढ़ जिले के पूंजीपथरा थाना क्षेत्र स्थित एनआरवीएस स्टील लिमिटेड प्लांट में हुई स्क्रैप चोरी के मामले का पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया। इस मामले में प्लांट के कर्मचारियों सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने चोरी गए 300 किलो एस.एस. स्क्रैप पाइप और परिवहन में इस्तेमाल ईको वाहन समेत कुल 9.08 लाख रुपये का मशरूका बरामद किया है। मामले में संगठित तरीके से अपराध किए जाने के कारण भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 112(2) भी जोड़ी गई है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक Shashi Mohan Singh के निर्देशन में संपत्ति संबंधी अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार चोरी की पूरी वारदात प्लांट के भीतर कार्यरत कर्मचारियों और बाहरी सहयोगियों की मिलीभगत से अंजाम दी गई थी।

स्क्रैप यार्ड से गायब मिले 300 किलो पाइप

एनआरवीएस स्टील लिमिटेड के प्रबंधक पवन अग्रवाल ने 6 जून की रात थाना पूंजीपथरा में शिकायत दर्ज कराई थी कि प्लांट के स्क्रैप यार्ड की जांच के दौरान लगभग 300 किलो एस.एस. स्क्रैप पाइप गायब पाए गए। चोरी गए पाइप की अनुमानित कीमत करीब 1 लाख 8 हजार रुपये बताई गई।

शिकायत के आधार पर थाना पूंजीपथरा में अपराध क्रमांक 135/2026 दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। थाना प्रभारी निरीक्षक रामकिंकर यादव के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मामले की जांच प्रारंभ की और प्लांट के कर्मचारियों से पूछताछ की।

मुखबिर की सूचना से खुला राज

जांच के दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि चोरी किया गया स्क्रैप पाइप जंगल क्षेत्र में छिपाकर रखा गया है और कुछ लोग उसे बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने एनआरवीएस स्टील प्लांट के पीछे क्षेत्र में घेराबंदी कर पांच संदिग्धों को हिरासत में लिया।

कड़ाई से पूछताछ करने पर सभी आरोपियों ने मिलकर चोरी की वारदात को अंजाम देना स्वीकार कर लिया।

ऐसे बनाई गई थी चोरी की पूरी योजना

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पहले से योजना बनाकर प्लांट के किल्न से निकाले गए खराब एस.एस. पाइप को फ्लाई ऐश (डस्ट) के भीतर छिपाकर बाहर निकालने की साजिश रची थी।

योजना के तहत प्लांट में जेसीबी ऑपरेटर के रूप में कार्यरत आरोपी बृज कुमार खटकर ने जेसीबी मशीन की सहायता से स्क्रैप पाइप को फ्लाई ऐश के भीतर दबा दिया। इसके बाद लोडर चालक दीपक कुमार कश्यप ने पाइप को ट्रेलर में लोड किया और उसके ऊपर फ्लाई ऐश भर दी, जिससे किसी को संदेह न हो।

ट्रेलर चालक नंदकिशोर विश्वकर्मा वाहन के जरिए पाइप को प्लांट से बाहर निकालकर गेरवानी क्षेत्र तक ले गया। बाद में आरोपी करन श्रीवास की ईको वाहन में स्क्रैप पाइप को लोड कर राजेश पटेल के साथ मिलकर तराईमाल जंगल में छिपा दिया गया। आरोपियों की योजना बाद में माल बेचकर रकम आपस में बांटने की थी।

जंगल से बरामद हुआ चोरी का माल

आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने तराईमाल जंगल से चोरी गए 300 किलो एस.एस. स्क्रैप पाइप बरामद किए। साथ ही चोरी के माल के परिवहन में उपयोग की गई ईको वाहन भी जब्त कर ली गई।

पुलिस के अनुसार बरामद एस.एस. स्क्रैप पाइप की कीमत 1 लाख 8 हजार रुपये तथा ईको वाहन की कीमत 8 लाख रुपये आंकी गई है। इस प्रकार कुल 9 लाख 8 हजार रुपये का मशरूका बरामद किया गया है।

संगठित अपराध की धारा जोड़ी गई

विवेचना के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि सभी आरोपियों ने पूर्व नियोजित तरीके से समूह बनाकर अपराध को अंजाम दिया था। इसे देखते हुए प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की धारा 112(2) (संगठित अपराध) भी जोड़ी गई है। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

एसएसपी का सख्त संदेश

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों में चोरी, गबन और अंदरूनी मिलीभगत से होने वाले अपराधों के प्रति रायगढ़ पुलिस जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठित अपराध में शामिल व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

ये आरोपी हुए गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपियों में नंदकिशोर विश्वकर्मा, राजेश कुमार पटेल, करन श्रीवास, दीपक कुमार कश्यप और बृज कुमार खटकर शामिल हैं। सभी आरोपियों की भूमिका जांच में सामने आने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।

इस पूरी कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सोनी और डीएसपी सुशांतो बनर्जी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी रामकिंकर यादव, प्रधान आरक्षक विनीत तिर्की तथा आरक्षक विनोद शर्मा, ओमप्रकाश तिवारी और सुरेन्द्र यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई से न केवल चोरी का खुलासा हुआ, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में संगठित तरीके से होने वाले संपत्ति संबंधी अपराधों पर भी प्रभावी अंकुश लगाने का संदेश गया है।

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