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पुरुषोत्तम मास के सोमवती अमावस्या पर महिलाओं ने पीपल वृक्ष की पूजन , परिक्रमा

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ब्यूरो चीफ – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली पवित्र नगरी अमरकंटक में पुरुषोत्तम मास के समापन तथा ज्येष्ठ मास की पावन सोमवती अमावस्या , मृगशिरा नक्षत्र और शुभ ग्रह-नक्षत्रों के दुर्लभ संयोग पर श्रद्धा , भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला । पूरे क्षेत्र में धर्ममय वातावरण छाया रहा और मां नर्मदा के पावन तटों पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा ।
प्रातः ब्रह्ममुहूर्त से ही लाखों भक्त-श्रद्धालु मां नर्मदा के पवित्र तट रामघाट , पुष्कर बांध , कोटि तीर्थ कुंड एवं आरंडी संगम पहुंचने लगे । श्रद्धालुओं ने पतित-पावनी मां नर्मदा में पुण्य स्नान कर जप , तप , ध्यान , दान एवं पूजन-अर्चन किया तथा मां नर्मदा उद्गम मंदिर में दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि , आरोग्य , यश एवं मंगलमय जीवन की कामना की ।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व होता है । इस दिन अमावस्या का सोमवार को पड़ना तथा मृगशिरा नक्षत्र का संयोग पुण्यफल को अनेक गुना बढ़ाने वाला माना जाता है । ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य और चंद्रमा के अमावस्या योग में स्थित होने तथा शुभ नक्षत्रीय प्रभाव के कारण यह तिथि स्नान , दान , जप और पितृ तर्पण के लिए अत्यंत फलदायी रही ।

सौभाग्यवती महिलाओं ने किया पीपल वृक्ष की पूजन

सोमवती अमावस्या के अवसर पर हजारों सौभाग्यवती महिलाओं ने नर्मदा मंदिर परिसर , रामघाट एवं आसपास स्थित पीपल वृक्षों का विधिवत पूजन अर्चन कर 108 परिक्रमा किया । महिलाओं ने कच्चे धागे बांध कर वृक्षों की परिक्रमा कर अपने पति एवं परिवारजनों के दीर्घायु , स्वस्थ एवं सुखमय जीवन की कामना की । अनेक महिलाओं ने श्रद्धाभाव से 108 परिक्रमा लगाकर व्रत एवं पूजन संपन्न किया ।

पूरे दिन मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार , भजन-कीर्तन , आरती और धार्मिक अनुष्ठानों की मधुर ध्वनि गूंजती रही । पुरोहितों एवं विद्वान पंडितों द्वारा भगवान शिव , भगवान विष्णु तथा मां नर्मदा की विशेष पूजा-अर्चना , जप एवं पाठ संपन्न कराया गया ।

धर्ममय रहा पूरा पुरुषोत्तम मास

लगभग एक माह तक चले पुरुषोत्तम मास के दौरान अमरकंटक में धार्मिकता का विशेष वातावरण बना रहा । देश के विभिन्न राज्यों राजस्थान , महाराष्ट्र , छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने विभिन्न आश्रमों में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया ।

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