मुंगेली में DMF फंड घोटाला उजागर: करोड़ों के विकास कार्य अधूरे, कई परियोजनाएं बंद

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मुंगेली । जिले में वर्ष 2023-24 के दौरान जिला खनिज न्यास निधि (DMF) से कराए गए कार्यों में व्यापक अनियमितताओं और फंड के दुरुपयोग के आरोप तेजी से सामने आ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस अवधि में जिले भर में 784 कार्य स्वीकृत किए गए थे, जिनकी प्रशासकीय मंजूरी 93.32 करोड़ रुपये तथा कुल 55.09 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश कार्यों में अनियमितता, आधे-अधूरे निर्माण और बंद पड़ी परियोजनाओं की शिकायतें मिल रही हैं।

रामगढ़ और करही में गड़बड़ियों का खुलासा : ग्राम रामगढ़ में जिला चिकित्सालय पहुंच मार्ग पर 50 नग हाइब्रिड सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने की स्वीकृति 07.09.2023 को दी गई थी। इसके लिए 28.50 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति और 22.80 लाख रुपये की राशि जारी की गई थी। विभागीय एजेंसी के रूप में अनुभागीय अधिकारी (वि./यां.)–लाइट मशीनरी नलकूप उपसंभाग सकरी को जिम्मेदारी दी गई थी। बावजूद इसके, सभी स्ट्रीट लाइट पूरी तरह बंद पड़ी हुई हैं, जिससे काम की गुणवत्ता और वास्तविक उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उधर ग्राम करही में 52 लाख रुपये से अधिक की लागत से निर्मित गढ़कलेवा भी लंबे समय से बंद पड़ा है। सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई इस परियोजना पर DMF फंड का उपयोग किया गया था। हैरानी की बात यह है कि बंद पड़े गढ़कलेवा में 12 लाख रुपये की विद्युत व्यवस्था और प्रकाश व्यवस्था पर खर्च दिखाया गया है, जिसका कोई ठोस सबूत स्थल पर नजर नहीं आता।

मुख्य आरोप : DMF फंड का दुरुपयोग : राशि का उपयोग ऐसे कार्यों में किया गया जो DMF के मूल उद्देश्यों—स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, पर्यावरण—से सीधे संबंधित नहीं हैं।

फर्जी फर्मों और टेंडर का खेल : कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी और निम्नस्तरीय कार्यों के बावजूद पूर्ण भुगतान का आरोप।

अधूरे और शुरू न हुए विकास कार्य : कई परियोजनाएं कागजों में पूर्ण दिखा दी गई हैं, जबकि जमीन पर उनकी स्थिति बदहाल या अधूरी बताई जा रही है।


विपक्ष का हमला : विपक्ष ने पूरे मामले को बड़ा घोटाला बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। कांग्रेस नेता संजीत बनर्जी ने कहा, “यह गरीबों, मजदूरों और आदिवासी समुदाय के हक़ पर सीधा डाका है। इसमें शामिल अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”

प्रशासन का पक्ष : जिला प्रशासन से संपर्क करने पर अधिकारियों ने स्वीकार किया कि मामले में शिकायतें प्राप्त हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि सभी आरोपों की जांच कराई जाएगी, और यदि अनियमितता सिद्ध होती है, तो संबंधित अधिकारियों, एजेंसियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जिले में DMF फंड से जुड़े इन मामलों ने ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के बीच चिंता और आक्रोश को और बढ़ा दिया है। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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