संविधान औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर राष्ट्रवादी सोच जागृत करने का माध्यम – महामहिम राष्ट्रपति


अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली । भारत अपनी संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक संरचना के कारण आज विश्व के लिये एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है। संविधान को अपनाने के समय जो तर्क दिये गये थे , वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। संविधान बनाने वालों का मकसद था कि इसके जरिये हमारी सामूहिक और व्यक्तिगत गरिमा और आत्म-सम्मान मजबूत बने। हमें गर्व है कि हमारे सांसद और संसद ने पिछले दशकों में जनता की आवाज को प्रभावी तरीके से संसद में पहुंचाया।
उक्त बातें महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के संविधान सदन (पुराना संसद भवन) के सेंट्रल हॉल में आयोजित 76वें संविधान दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कही। उन्होंने कहा कि संविधान दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। आज ही के दिन 26 नवंबर 1949 को संविधान भवन के इसी केंद्रीय कक्ष में संविधान सभा के सदस्यों ने भारत के संविधान का प्रारूप तैयार करने का कार्य पूरा किया था। उसी वर्ष आज ही के दिन हम भारत के लोगों ने अपने संविधान को अंगीकार किया था। स्वतंत्रता के बाद संविधान सभा ने भारत की अंतरिम संसद के रूप में भी कार्य किया। प्रारूप समिति के अध्यक्ष बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर हमारे संविधान के प्रमुख निर्माताओं में से एक थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा तीन तलाक से जुड़ी सामाजिक बुराई पर अंकुश लगाकर संसद ने हमारी बहनों और बेटियों के सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाये। समारोह को संबोधित करते हुये राष्ट्रपति मुर्मू ने संसद द्वारा तीन तलाक को समाप्त करने के निर्णय को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुये कहा कि तीन तलाक जैसी सामाजिक बुराइयों का उन्मूलन महिलाओं के अधिकार और सम्मान को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। राष्ट्रपति ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के प्रभाव पर भी जोर देते हुये इसे आजादी के बाद का सबसे बड़ा कर सुधार करार दिया। उन्होंने कहा कि जीएसटी ने ना केवल कर प्रणाली को सुगम बनाया है , बल्कि देश की आर्थिक एकता को भी मजबूत किया है। राजनीतिक सुधारों पर राष्ट्रपति ने कहा कि अनुच्छेद 370 के हटाने से देश की राजनीतिक एकता में बाधा दूर हुई , जबकि नारी शक्ति बंधन कानून महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की नई दिशा प्रदान करेगा। अनुच्छेद 370 को हटाये जाने से एक ऐसी बाधा दूर हुई जो देश के समग्र राजनीतिक एकीकरण में रुकावट डाल रही थी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला नेतृत्व वाले विकास के एक नये युग की शुरुआत करेगा। उन्होंने कहा कि संवैधानिक ढांचे के अनुरूप देश की कार्यपालिका , विधायिका और न्यायपालिका ने ना केवल राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है , बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के जीवन को मजबूती और दिशा प्रदान की है। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ते हुये हमारे देश की कार्यपालिका , विधायिका और न्यायपालिका ने देश के विकास और देशवासियों के जीवन को संबल प्रदान किया है। संसद के दोनो सदनों के सदस्यों ने हमारे देश को आगे बढ़ाने के साथ-साथ गहन राजनीतिक चिंतन की स्वस्थ परपंरा विकसित की है। उन्होंने संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा विकसित स्वस्थ राजनीतिक चिंतन की परंपरा को भारतीय लोकतंत्र की शक्ति बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत दुनियाँ की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है और इसका श्रेय हमारी संस्कृति , संविधान और लोकतंत्र की मजबूत नींव को जाता है। महिलायें अब बढ़ चढ़कर वोटिंग कर रही हैं। पंचायत से लेकर संसद तक महिलायें सशक्त हुई हैं और समावेशी विकास के प्रयास जारी हैं।उन्होंने कहा कि भविष्य में जब विश्व के संविधानों और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन होगा , तो भारतीय संविधान और लोकतंत्र का उल्लेख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा। उन्होंने देश के नेताओं और सभी नागरिकों को भारतीय लोकतंत्र की इस गौरवशाली विरासत के संरक्षक और सहभागी बताया। महामहिम राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर राष्ट्रवादी सोच अपनाने का मार्ग दिखाता है। उन्होंने पच्चीस करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने को देश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया और कहा कि महिलायें , युवा , किसान , मध्यम वर्ग और वंचित समाज के समूह लोकतंत्र की नींव को निरंतर मजबूत कर रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रपति मुर्मू ने विश्वास व्यक्त किया कि संसद के मार्गदर्शन में ‘विकसित भारत’ का संकल्प अवश्य पूरा होगा। उन्होंने संविधान दिवस की शुभकामनायें देते हुये देशवासियों के स्वर्णिम भविष्य की कामना की। इस समारोह ने एक बार फिर यह संदेश मजबूत किया कि भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं , बल्कि राष्ट्र की आत्मा और उसके उज्ज्वल भविष्य का मार्गदर्शक है।
हमारे देश की आत्मा है संविधान – उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि संविधान हमारे देश की आत्मा है और इसी ने भारत को एक महान लोकतंत्र बनाया है। हमारे संविधान का मसौदा , उस पर हुई बहस और उसे अपनाने की प्रक्रिया , देश की आजादी के लिये लड़ने वाले लाखों लोगों की सामूहिक समझ , त्याग और सपनों का प्रतीक है। महान विद्वानों , ड्राफ्टिंग कमिटी और संविधान सभा के सदस्यों ने करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुये गहन विचार किया और बिना किसी स्वार्थ के अपना योगदान दिया , जिसके परिणामस्वरूप भारत आज दुनियां का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। उन्होंने कहा हमारा संविधान अनुभव , समझ , त्याग , उम्मीदों और आकांक्षाओं पर आधारित है और इसकी आत्मा ने साबित किया है कि भारत एक था , एक है और हमेशा एक रहेगा।
दुनियाँ का सबसे बड़ा जीवंत लोकतंत्र है भारत – ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संविधान दिवस की शुभकामनाएं देते हुये कहा कि संविधान हमें बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के परिश्रम और दूरदृष्टि के कारण मिला है , जिसने जनता की आकांक्षाओं को अपना आधार बनाया। उन्होंने कहा कि भारत दुनियां का सबसे बड़ा जीवंत लोकतंत्र है और हमारा संविधान हर नागरिक को न्याय , समानता , भाईचारा , सम्मान और गरिमा की गारंटी देता है। ओम बिरला ने यह भी कहा कि संविधान सभा का सेंट्रल चैंबर वह पवित्र स्थान है जहां गहन चर्चा , संवाद और विचार-विमर्श के बाद संविधान को रूप दिया गया और जनता की उम्मीदों को संवैधानिक प्रावधानों में शामिल किया गया।
मजबूत लोकतंत्र की नींव है संविधान – पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नागरिकों से अपने संवैधानिक कर्तव्यों को निभाने का आग्रह करते हुये कहा कि ये मजबूत लोकतंत्र की नींव हैं। संविधान दिवस पर नागरिकों को संबोधित पत्र में प्रधानमंत्री ने मताधिकार का प्रयोग करके लोकतंत्र को मजबूत करने की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया और सुझाव दिया कि स्कूल और कॉलेज अठारह वर्ष की आयु पूरी करके पहली बार मतदाता बनने वालों का सम्मान करते हुये संविधान दिवस मनायें। इस दौरान पीएम मोदी ने संविधान सभा के सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. राजेंद्र प्रसाद , डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे महान व्यक्तित्वों व कई विशिष्ट महिला सदस्यों को याद किया , जिनकी दृष्टि से संविधान समृद्ध हुआ। गौरतलब है कि इस संविधान दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय लोकतंत्र की गौरवशाली यात्रा और भविष्य की दिशा को एक प्रभावशाली संदेश के साथ देश के सामने रखा। उन्होंने इस अवसर पर देश को सशक्त बनाने वाले महत्वपूर्ण कानूनी और आर्थिक सुधारों को रेखांकित किया और संविधान को नौ नई भाषाओं में जारी किया। समारोह का आरंभ उस क्षण से हुआ जब मलयालम , मराठी , नेपाली , पंजाबी , बोडो , कश्मीरी , तेलुगु , ओड़िया और असमिया इन नौ भारतीय भाषाओं में संविधान का डिजिटल संस्करण जारी किया गया , यह भारतीय भाषाई विविधता और लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बना। नौ भाषाओं में संस्करण का यह कदम अधिक से अधिक लोगों को अपनी मातृभाषा में संविधान पढ़ने और समझने का अवसर देगा , जिससे कानूनी साक्षरता और समावेशिता बढ़ेगी। उन्होंने विश्वास प्रकट किया कि भारत निकट भविष्य में दुनियाँ की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है। समारोह के दौरान पूरा हॉल उस समय एक सुर में गूंज उठा जब राष्ट्रपति के नेतृत्व में सभी सांसदों ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया और उसके बाद राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया। सेंट्रल हॉल की गंभीरता , लोकतांत्रिक उत्साह और संवैधानिक गौरव ने इस क्षण को अत्यंत विशेष और ऐतिहासिक बना दिया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू के अलावा उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला , कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे , लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और दोनों सदनों के सांसद शामिल हुये। यह अवसर भारत के लोकतांत्रिक ढांचे का जश्न मनाने और देश की न्याय , स्वतंत्रता , समानता और भ्रातृत्व की प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर था।

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