विभाजन की विभीषिका पर परिचर्चा और क्विज प्रतियोगिता, विद्यार्थियों ने रखे संवेदनशील विचार
रिपोर्टर 🖋️ कमलेश सिंह
कवर्धा। स्कूल शिक्षा विभाग के तत्वावधान में ‘विभाजन की विभीषिका’ विषय पर परिचर्चा एवं क्विज प्रतियोगिता का आयोजन स्वामी करपात्री जी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कवर्धा में किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी एफ.आर. वर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में कवर्धा विकासखंड के 10 शासकीय एवं अशासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम नोडल अधिकारी यू.आर. चन्द्राकर, सहायक संचालक एम.के. गुप्ता, नीलेश चन्द्रवंशी एवं एमआईएस प्रशासक सतीश कुमार यदु के नेतृत्व में संपन्न हुआ। परिचर्चा के दौरान विद्यार्थियों ने भारत विभाजन से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं, उसके सामाजिक प्रभाव और मानवीय त्रासदी पर अपने विचार रखे। परिचर्चा में रामकृष्ण पब्लिक स्कूल कवर्धा के विद्यार्थी आदित्य नारायण तिवारी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर हुई विस्तृत चर्चा

परिचर्चा के लिए आमंत्रित इतिहास के जानकार एवं सेवानिवृत्त व्याख्याता आदित्य श्रीवास्तव, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी कवर्धा अजय चन्द्रवंशी तथा सहायक परियोजना समन्वयक अवधेश नंदन श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने बताया कि 15 अगस्त 1947 को भारत ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की, लेकिन स्वतंत्रता के साथ ही देश के इतिहास की सबसे बड़ी और दर्दनाक त्रासदियों में से एक विभाजन भी हुआ। भारत और पाकिस्तान का विभाजन केवल भौगोलिक सीमाओं का निर्धारण नहीं था, बल्कि इसके कारण करोड़ों लोगों की संस्कृति, परिवार, संपत्ति और जीवन प्रभावित हुआ।
परिचर्चा में अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति, 1857 के बाद की राजनीतिक परिस्थितियों, 1909 के मार्ले-मिंटो सुधारों के तहत पृथक निर्वाचिका तथा द्वि-राष्ट्र सिद्धांत सहित विभाजन की पृष्ठभूमि पर विस्तार से चर्चा की गई। लार्ड माउंटबेटन की विभाजन योजना और सर सिरिल रेडक्लिफ द्वारा सीमाओं के निर्धारण के साथ ही इसके परिणामस्वरूप हुए व्यापक मानवीय विस्थापन एवं सांप्रदायिक हिंसा पर भी प्रकाश डाला गया।
वक्ताओं ने कहा कि विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर, जमीन, व्यवसाय और संपत्ति छोड़कर पलायन करना पड़ा। शरणार्थी शिविरों में लोगों को भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सांप्रदायिक हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और हजारों परिवार बिछड़ गए। विभाजन का प्रभाव केवल तत्कालीन समय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव आज भी महसूस किए जाते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर मुख्य वक्ताओं को विभाग की ओर से स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्वामी करपात्री जी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य डी.एस. जोशी सहित विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता जितेंद्र सिंह ठाकुर ने किया।
क्विज प्रतियोगिता में सेजेस दुर्गावती चौक की टीम प्रथम
कार्यक्रम के दूसरे चरण में स्वतंत्रता संग्राम एवं भारतीय संविधान पर आधारित क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रत्येक विद्यालय से चार विद्यार्थियों की टीम ने प्रतियोगिता में अपने विद्यालय का प्रतिनिधित्व किया।
प्रतियोगिता में सेजेस दुर्गावती चौक कवर्धा की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। गुरुकुल पब्लिक स्कूल की टीम द्वितीय तथा होली किंगडम स्कूल की टीम तृतीय स्थान पर रही। विजेता प्रतिभागियों को विभाग की ओर से मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।
14 अगस्त को मनाया जाता है विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस
भारत विभाजन के दौरान गंवाई गई जानों और लोगों द्वारा झेले गए कष्टों की स्मृति में भारत सरकार द्वारा वर्ष 2021 से प्रत्येक वर्ष 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उससे जुड़ी मानवीय त्रासदी और इतिहास से मिलने वाली सीख से परिचित कराना रहा। परिचर्चा एवं क्विज के माध्यम से विद्यार्थियों को देश के इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय को समझने तथा सामाजिक एकता और सद्भाव के महत्व को आत्मसात करने का अवसर मिला।

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