अमरकंटक के पंचधारा में तपस्यारत संत का हुआ स्वर्गवास


ब्रम्हलीन संत श्री राम दास जी का होगा जन्मस्थली में अंतिम संस्कार-सुदामा सिंह
संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय
अमरकंटक । मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक से लगभग दस किलोमीटर दूर पश्चिम दिशा की ओर नर्मदा तट पर स्थित पंचधारा रेवा आश्रम के श्रीमहंत संत श्री राम दास जी महाराज जिनकी उम्र लगभग 59 – 60 का बताया गया ।
अस्वस्थता के बाद उन्हें महाराष्ट्र के बुलढाणा स्थित चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जिसके बाद उनका स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण आज रविवार को दुखद निधन हो गया । वे लगभग 30 वर्षों से पंचधारा स्थल में तपस्या में लीन संत श्री राम दास जी महाराज का जन्म लावा-घुघरी , पांढुरना (जिला छिंदवाड़ा) में हुआ था । वे पूर्व विधायक सुदामा सिंह सिंग्राम के पूज्य गुरुदेव थे ।
पूर्व विधायक सुदामा सिंह सिंग्राम ने बताया कि संत जी के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार उनके जन्मस्थल पर किया जाएगा । उन्होंने कहा कि संत जी ने जीवनभर साधना व सेवा का मार्ग अपनाया । आश्रम में पधारे परिक्रमा वासियों की और संत सेवा करने वाले ऐसे तपस्वी महापुरुष को मां नर्मदा अपने चरणों में स्थान दें ।
उनके भक्तों और श्रद्धालुओं में शोक की लहर है ।
अमरकंटक से लगभग 10 किलोमीटर दूर कपिलधारा से आगे गहरे जंगलों के मध्य स्थित दूधधारा के आगे पंचधारा वह पावन स्थल है , जहाँ नर्मदा नदी पाँच धाराओं में विभाजित होकर बहती है । इसी शांत और कठोर प्राकृतिक वातावरण में संत जी तीन दशक से अधिक समय तक साधना में रत रहे । अस्वस्थता के चलते वे लंबे समय से अमरकंटक मंदिर व बाजार में दिखाई भी नहीं दिए ।
उनके देहावसान की सूचना मिलते ही संपूर्ण अमरकंटक क्षेत्र व आपस पास के ग्रामों तथा भक्तों , शिष्यों में शोक और सन्नाटा छा गया है । संत जी का तप और त्याग सदैव क्षेत्रवासियों और नर्मदा भक्तों को प्रेरित करता रहेगा ।

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