आनंद की प्राप्ति ही जीव का चरम लक्ष्य है – स्वामी युगल शरण

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अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
चाम्पा । जीव आनंद की प्राप्ति के लिये ही कार्य करता हैं और यह आनंद ईश्वर में ही मिल सकता है। वेद और गीता में भी आनंद की प्राप्ति को ही जीवन का लक्ष्य बताया गया है। प्रत्येक जीव आस्तिक होते हैं और आनंद प्राप्ति ही उनका चरम लक्ष्य है। आनंद अनंत यात्रा का और अनंतकाल के लिये होता है , सीमित मात्रा का नहीं। यह प्रतिक्षण वर्धमान है और इसके ऊपर कभी भी दुःख का अधिकार नहीं होता हैं।
                                      उक्त बातें कोसा , कांसा और कंचन की नगरी में ब्रज गोपिका सेवा मिशन द्वारा परशुराम चौक स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में आयोजित आध्यात्मिक और धार्मिक प्रवचन में जगद्गुरुत्तम स्वामी श्री कृपालुजी महाराज के प्रमुख प्रचारक डॉ स्वामी युगल शरणजी ने विलक्षण दार्शनिक प्रवचन के द्वितीय दिवस कही। उन्होंने बताया कि आनंद प्राप्ति के लिये विश्व में जितने भी वादों के विवाद चल रहे हैं , उनको हम दो वादों में विभक्त कर सकते हैं – भौतिकवाद और अध्यात्मवाद। कथा का रसपान करने दैनिक समाचार-पत्रों से सम्बद्ध तथा पूर्व सहायक प्राध्यापक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय चांपा के शशिभूषण सोनी पूरे समय कथा स्थल पर समाचार और आध्यात्मिक प्रवचन की रिपोर्टिंग करते रहे। शशिभूषण सोनी ने बताया कि महाराज जी आज पूर्णतः प्रसन्नचित्त दिखाई दे रहे थे। महराजश्री ने कहा कि भौतिकवाद की उन्नति से अन्तःकरण की शुद्धि सर्वथा असम्भव है और उसके बिना सुख-शान्ति की आशा रखना व्यर्थ है। अपने आध्यात्मिक प्रवचन के अंत में स्वामीजी ने निष्कर्ष निकाला कि प्रत्येक जीव का चरम लक्ष्य आनंद प्राप्ति ही है और यह आनंद ईश्वर में ही मिल सकता हैं। उन्होंने बताया कि हम सब भगवान के ही अनुयायी हैं। वेदान्त दर्शन को ब्रह्मसूत्र या उत्तर मीमांसा भी कहते हैं , जिसका लक्ष्य आनंद प्राप्ति हैं। आज प्रवचन के द्वितीय दिवस कथा श्रवण करने सत्येन्द्र सिह , पुरुषोत्तम शर्मा , डां रमाकांत सोनी , राकेश शर्मा , श्रीमति कुसुम-कृष्णा पाण्डेय , श्रीमति संगीता-सुरेश पाण्डेय , रजनी-सिद्धनाथ सोनी सहित अन्यान्य लोग पहुंचे हुये थे।

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