जनता की आवाज नहीं सुनना और अराजक माहौल बनाना ही सरकार की फितरत हो चली है ये तो लोकतंत्र नहीं है – जसबीर सिंह चावला


रायपुर । पूरे प्रदेश में जमीन की खरीदी बिक्री के लिए सरकार से जारी नई दरों और रोक के खिलाफ धरना- प्रदर्शन अब उग्र होता जा रहा है। जन चेतना पार्टी के संस्थापक जसबीर सिंह चावला ने कहा कि ये तो अति हो गई कि जनता की आवाज नहीं सुनना और पूरे राज्य में अराजक माहौल फैलाना ही सरकार की फितरत हो चली है ये तो लोकतंत्र नहीं है । पुलिस और प्रशासन व्यवस्था का इन गतिविधियों को रोकना कितना मुश्किल कार्य हो जाता है। इसमें तमाम पक्षों के लोग और पुलिस घायल भी होते है और आवेश में अनहोनी होने की आशंका भी बनी रहती है।
जन चेतना पार्टी के संस्थापक अभिषेक बाफना ने आगे कहा
किसी भी समस्या या विषय से जुड़े संगठन और संबंधित संघ से भी चर्चा कर आम राय कायम कर भी वाजिब शुल्क बढ़ोतरी की जा सकती है इतना ही नहीं 5 डिसमिल से कम जमीन की रजिस्ट्री पर रोक पर भी न्यायसंगत तर्क वितर्क पर चर्चा करके उनको अमल में लाया जा सकता है। इससे राजस्व की हानि से बचा जा सकता है जो इन दिनों लगातार हो रही है।इसी तरह किसी विधायक की सिर्फ जिद और सरकार में होने की ताकत से व्यवस्थापन जैसे कार्य कहां तक सही है ?
उदाहरण के लिये साइंस कॉलेज चौपाटी का व्यवस्थापन वहां व्यवसाय कर रहे और उनसे जुड़े कामगारों के जीवन यापन की समस्या को ध्यान दिए बिना व्यवस्थापन करना और पूर्व में बनाई गई चौपाटी को अवैध बताते हुए उसे बनाने में राजस्व हानि को ताक पर रखकर ये कार्य करवाना कहा तक तर्कसंगत है।
सरकार के मनमाने निर्णय और ज्यादतियों के लिये जनता को मूक बनकर अपना नुकसान सहकर ,सिर्फ प्रदर्शन, हड़ताल कर लाठियां ही खानी पड़ेगी ।जन समस्या या उस पेशे और व्यवसाय से जुड़े आम जन के प्रतिनिधियों से चर्चा कर ही इस तरह के निर्णय लिये जा सकते है जिससे प्रशासन और जनप्रतिनिधि समाज के बेहतर कार्यों को मूर्तरूप और क्रियान्वन में अपना बहुमूल्य समय लगाकर प्रदेश के विकास को गति दे सके और शांतिपूर्ण माहौल बना रहे जो छत्तीसगढ़ की प्राचीन परंपरा रही है ।
सरकार को जनभागीदारी से शास्त्री चौक रायपुर में बन रहे *स्काईवॉक* पर भी अपनी जिद को पूरा करना मात्र अपना लक्ष्य न मानते हुए इन बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए
1.कितने लोग इसका उपयोग कर पाएंगे क्योंकि लगभग 20 से 25ft ऊपर चढ़कर उतरना क्या आम नागरिक सामान्य तौर पर करने को तैयार होगा।
2 . एस्केलेटर और लिफ्ट की बात की जाती है तो क्या इस सिस्टम का बिना ac के मेंटिनेंस संभव है? क्योंकि हम अपने मॉल और रेलवे स्टेशन पर ही इनके हालत से भली भांति परिचित है ।हमारे बाग बगीचों में साधारण जिम के उपकरण का रख रखाव के हालत की चर्चा आए दिन समाचार पत्रों और जनता के बीच होती रहती है फिर इन भारी भरकम उपकरणों का रखरखाव कैसे होगा?
जनता के पैसे का दुरुपयोग हमे रोकना होगा चाहे कोई भी सरकार हो ऐसा संस्थापक जयंत गायधने ने जनता की ओर से पक्ष रखते हुए कहा इन बातों पर शासन ने पुनः संज्ञान लेकर ध्यान देना चाहिए।

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