दंडवत परिक्रमा कर रही प पु माता जी , चौमासा व्यतीत की अमरकंटक में ।

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अब वे माई बगिया क्षेत्र मार्ग पर निवास कर रही , महाशिवरात्रि पर आगे बढ़ाएंगी नर्मदा परिक्रमा

संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्यायअमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में आज पंद्रह दिवस पूर्व प पु माता जी द्वारा पवित्र नर्मदा नदी की दंडवत परिक्रमा दक्षिण तट से प्रारंभ की गई थी । उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा 27 मई 2020 को ओंकारेश्वर दक्षिण से प्रारंभ की थी । अब तक उनके पांच वर्ष पूर्ण हो कर छठवें में प्रवेश कर चुकी हैं और छठवां वर्ष जारी है ।

अमरकंटक । मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में आज पंद्रह दिवस पूर्व प पु माता जी द्वारा पवित्र नर्मदा नदी की दंडवत परिक्रमा दक्षिण तट से प्रारंभ की गई थी । उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा 27 मई 2020 को ओंकारेश्वर दक्षिण से प्रारंभ की थी । अब तक उनके पांच वर्ष पूर्ण हो कर छठवें में प्रवेश कर चुकी हैं और छठवां वर्ष जारी है ।

चौमासा काल में वह शहडोल रोड सनसाईन (सूर्योदय) क्षेत्र के पास लगभग चार माह ठहरी रहीं । वर्तमान में माता जी अमरकंटक गणेश धुना से आगे माई बगिया रोड पर विश्रामरत हैं । यहाँ उनका निवास महाशिवरात्री तक रहेगा । इसके बाद महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर वह पुनः दंडवत प्रणाम करते हुए अपनी नर्मदा परिक्रमा यात्रा आगे पुनः प्रारंभ कर जाएंगी ।

माता जी अकेले ही यात्रा कर रही हैं , किन्तु उनके साथ एक कुत्ता और एक तोता भी सतत संग चल रहा है । माता जी ने अपनी साइकिल को ही छोटे रथ का स्वरूप दिया है , जिस पर वह मां नर्मदा जी की प्रतिमा विराजित कर साथ रखती हैं । इसी रथ पर भोजन प्रसादी एवं उपयोग की सामग्री सुरक्षित रखी जाती है ।

भोजन व्यवस्था के बारे में पूछे जाने पर माता जी ने कहा—
“मां नर्मदा जी की असीम कृपा है, प्रसाद की कभी कमी नहीं होती ।”
उन्होंने अब तक पांच भंडारे भी संपन्न करा चुकी हैं ।

माता जी रोजाना रंगोली बनाती हैं और उस पर तुलसी माता को विराजमान कर आरती, पूजन और भजन कर भक्ति में लीन रहती हैं। भक्तजन और परिक्रमावासी प्रतिदिन उनके दर्शन का लाभ लेने पहुँच रहे हैं ।

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