वेदांता एल्युमीनियम ने भारत के ऊर्जा लक्ष्यों को सशक्त बनाया, वित्तीय वर्ष 25 में 1.57 बिलियन यूनिट हरित ऊर्जा का उपभोग किया।


रिपोर्टर ✒️ रानू बैरागी
• जीएचजी तीव्रता में 8.96% की कमी; सामुदायिक संरक्षण पहलों में 141.1 करोड़ रुपए का निवेश कर्मचारियों को जागरूक करने के लिए सभी स्थलों पर ऊर्जा-दक्षता प्रशिक्षण शुरू स्थिरता उपायों के माध्यम से 378 एमयू की ऊर्जा बचत हासिल 2030 तक 30% लो-कार्बन एल्युमीनियम पोर्टफोलियो का लक्ष्य निर्धारित


रायपुर ।भारत के सबसे बड़े एल्युमीनियम उत्पादक वेदांता एल्युमीनियम ने घोषणा की है कि उसने वित्तीय वर्ष 25 में 1.57 बिलियन यूनिट नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग किया। यह 2030 तक कार्बन उत्सर्जन कम करने के उसके रोडमैप में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही, वेदांता एल्युमीनियम ने वित्तीय वर्ष 21 की तुलना में 8.96% ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन तीव्रता में कमी दर्ज की है, लगभग 1,500 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की दीर्घकालिक खरीद योजना को मजबूत किया है, और अपने संचालन में ऊर्जा-दक्षता परियोजनाओं का विस्तार जारी रखा है। ये सभी कदम भारत में कम-कार्बन विनिर्माण की दिशा में कंपनी की अग्रणी भूमिका को दर्शाते हैं। वित्तीय वर्ष 25 में, वेदांता एल्युमीनियम ने लंबी अवधि के नवीकरणीय ऊर्जा खरीद समझौतों के माध्यम से अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार किया, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को उसकी संचालन रणनीति का एक मुख्य स्तंभ बनाया गया। वेदांता एल्युमीनियम ने ऊर्जा संरक्षण, प्रक्रिया अनुकूलन, डिजिटल हस्तक्षेपों और संसाधन दक्षता के क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। इसमें उन्नत वेस्ट-हीट रिकवरी, बॉयलर और टर्बाइन के बेहतर प्रदर्शन, ऊर्जा-कुशल तकनीकों का उपयोग और प्लांट के संचालन में ऊर्जा खपत कम करने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल हैं।
वेदांता एल्युमीनियम ने हाल के वर्षों में कई प्रभावशाली ऊर्जा-संरक्षण पहलें लागू की हैं, जिनमें इसकी पेटेंटेड पॉटलाइनिंग तकनीक भी शामिल है, जो प्रति टन एल्युमीनियम उत्पादन में 200 किलोवाट तक ऊर्जा की बचत करती है और स्मेल्टर की दक्षता बढ़ाती है। कंपनी ने व्यापक स्थिरता उपायों के माध्यम से 378 मिलियन यूनिट (एमयू) ऊर्जा की बचत भी हासिल की है, जो कुल ऊर्जा खपत को कम करने पर उसके निरंतर ध्यान को दर्शाती है। इस प्रगति के आधार पर, वेदांता एल्युमीनियम की वित्तीय वर्ष 25 उपलब्धियाँ स्वच्छ ऊर्जा और डीकार्बनाइजेशन की उसकी दीर्घकालिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण आगे बढ़ने वाला कदम साबित होती हैं। अपनी दीर्घकालिक जलवायु रणनीति को मजबूत करते हुए, वेदांता एल्युमीनियम ने 2025 में पीडब्ल्यूसी इंडिया के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की, ताकि डीकार्बनाइजेशन, जल-धनात्मकता और जैव विविधता से जुड़ी पहलों को सभी प्रमुख स्थानों पर बढ़ाया जा सके। कंपनी ने कार्बन, पानी, कचरा, जैव विविधता और टेलिंग्स पर केंद्रित ‘कम्युनिटीज़ ऑफ प्रैक्टिस’ भी स्थापित की हैं, जो प्रदर्शन की निरंतर निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन को संभव बनाती हैं। अपने 2030 लक्ष्यों के तहत, कंपनी का उद्देश्य है कि उसके उत्पादों में से 30% हिस्सा लो-कार्बन एल्युमीनियम का हो, जिसे उसकी रेस्टोरा और रेस्टोरा अल्ट्रा उत्पाद श्रृंखला के विस्तार द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है। इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए वेदांता एल्युमीनियम के सीईओ राजीव कुमार ने कहा , “हमारी स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता सिर्फ छोटे-छोटे सुधारों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में एल्युमीनियम उत्पादन के तरीके को बदलने की दिशा में है। इस वर्ष 1.57 बिलियन यूनिट नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके हम कम-कार्बन भविष्य की ओर अपनी यात्रा को तेज कर रहे हैं और स्वच्छ ऊर्जा तथा दक्षता को अपने संचालन के केंद्र में ला रहे हैं। यह उपलब्धि भारत के हरित विनिर्माण परिवर्तन का नेतृत्व करने और अपने समुदायों व हितधारकों के लिए साझा मूल्य बनाने के हमारे संकल्प को दर्शाती है।” अपनी संचालन प्रक्रिया में ऊर्जा जिम्मेदारी की संस्कृति को और मजबूत करने के लिए, वेदांता एल्युमीनियम ने व्यापक ऊर्जा-दक्षता प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य सभी स्थलों पर कर्मचारियों को जागरूक बनाना है। संरचित जागरूकता कार्यक्रमों और क्षमता-वृद्धि सत्रों के माध्यम से कंपनी ऊर्जा उपयोग को वैश्विक बेहतरीन प्रथाओं और अंतर्राष्ट्रीय मानकों, जैसे- आईएसओ 50001 फॉर एनर्जी मैनेजमेंट, के अनुरूप अनुकूलित करना चाहती है।


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