भारत के पहले डीवी कपूर फाउंडेशन एनर्जी इनोवेशन अवॉर्ड्स के दौरान ऊर्जा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए दिए गए पुरस्कार


एनटीपीसी नेत्रा और सीएसआईआर वैज्ञानिक को तकनीकी इनोवेशन्स के लिए मिले पुरस्कार
नई दिल्ली । भारत में ऊर्जा की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने और दीर्घकालिक स्थायित्व के लक्ष्यों को समर्थन प्रदान करने में बेहतरीन तकनीकी नवाचारों को सम्मानित करने के लिए, डीवी कपूर फाउंडेशन ने 12 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित स्कोप कॉम्प्लेक्स में पहले डीवी कपूर फाउंडेशन एनर्जी इनोवेशन अवॉर्ड्स का आयोजन किया।


भारत सरकार में प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने विजेताओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम में डॉ सुरेश प्रभु, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं चेयरमैन, डीवी कपूर फाउन्डेशन; पद्म विभूषण, डॉ अनिल काकोड़कर, पूर्व चेयरमैन, एटॉमिक एनर्जी कमिशन और ग्रैंड जूरी के चेयरमैन; डॉ डीवी कपूर, फाउन्डेशन के संस्थापक और एनटीपीसी लिमिटेड के फाउंडर चेयरमैन; श्री आरवी शाही, पूर्व सचिव (एमओपी) एवं ट्रस्टी सदस्य, डीवी कपूर फाउन्डेशन एवं ग्रैंड जूरी के सदस्य; डॉ अजय माथुर, पूर्व महानिदेशक, इंटरनेशनल सोलर अलायन्स; तथा डॉ रंगन बैनर्जी, डायरेक्टर (आईआईटी-दिल्ली), एनटीपीसी के वरिष्ठ लीडर्स और ऊर्जा सेक्टर के लीडर भी मौजूद रहे।

पुरस्कार दो श्रेणियों में दिए गएः 38 वर्ष से कम उम्र के युवा इनोवेटर्स को कैटेगरी 1 में सम्मानित किया गया। वहीं कैटेगरी 2 में व्यक्तियों एवं संगठनों को तकनीकी इनोवेशन्स के लिए पुरस्कार दिए गए।
डॉ. अचु चंद्रन, प्रिंसिपल साइंटिस्ट, CSIR-NIIST को ’नैनो इलेक्ट्रिसिटी जनरेटर’ के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए कैटेगरी 1 में एक प्रशस्ति पत्र, ट्रॉफी और 1 लाख रुपये का नकद पुरस्कार मिला।
एनटीपीसी की आर एंड डी विंग, नेत्रा को ’ग्रीन यूज़ ऑफ़ कोल टेक्नोलॉजीज़’ के क्षेत्र में आधुनिक अनुसंधान के लिए कैटेगरी 2 में पुरस्कार मिला। श्री शश्वतम, ईडी (नेत्रा) ने अपनी टीम के साथ यह पुरस्कार प्राप्त किया, जिसमें एक प्रशस्ति पत्र, ट्रॉफी और 10 लाख रुपये का नकद इनाम शामिल था।
डीवी कपूर फाउंडेशन ऊर्जा सेक्टर में तकनीकी इनोवेशन को बढ़ावा देने तथा अनुसंधान, विकास एवं ऐसे स्वदेशी समाधानों को सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो भारत के स्वच्छ ऊर्जा रूपांतरण को मज़बूत बनाते हैं।
इस अवसर पर सभा को सम्बोधित करते हुए प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की तकरीबन 18 फीसदी आबादी को सेवाएं प्रदान करती है तथा 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनोमी बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। विकास एवं ऊर्जा के उपयोग के बीच सीधा संबंध बताते हुए उन्होंने कहा कि देश का ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स (एचडीआई) ऊर्जा की खपत के साथ बेहद करीब से जुड़ा है। भारत का औसत एचडीआई 0.67 है, जबकि विकसित देशों में यह लगभग 0.9 है। वर्तमान में भारत प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष लगभग 21 गीगाजूल ऊर्जा की खपत करता है, ऐसे में विकसित देशों के समकक्ष पहुंचने के लिए लगभग 56 गीगाजूल की ज़रूरत होगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए ज़रूरी कदम उठाने होंगे। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की शुरुआत से देश में डीप टेक रिसर्च के लिए माहौल बदल रहा है, इससे विकसित भारत के निर्माण को गति मिल रही है।
डॉ. सुरेश प्रभु ने अपने संबोधन में ऊर्जा इनोवेशन में बदलते प्रतिमानों पर ज़ोर दिया और एनटीपीसी में संस्थापक चेयरमैन के तौर पर डॉ. डी.वी. कपूर की प्रेरणादायक भूमिका और डीवीकेएफ के तहत पुरस्कारों की शुरूआत की सराहना की।
डॉ. अनिल काकोडकर ने पुरस्कार के लिए चुनाव प्रक्रिया की सख्ती पर रोशनी डाली और ज़ोर दिया कि वरिष्ठ लीडर को युवाओं को मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करना होता है ताकि वे देश को विकास के पथ पर अग्रसर कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें।
पुरस्कार समारोह में ऊर्जा जगत के विशेषज्ञ एवं गणमान्य दिग्गज भी शामिल हुए।

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