सहभागिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता से ही सुशासन संभव : डॉ. संजय अलंग


रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
सुशासन सप्ताह के तहत जिला स्तरीय नवाचार कार्यक्रम आयोजित
बिलासपुर । राज्य शासन के निर्देशानुसार 19 से 25 दिसंबर तक मनाए जा रहे सुशासन सप्ताह के अंतर्गत मंगलवार को जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में जिला स्तरीय नवाचार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. संजय अलंग मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए और सुशासन की अवधारणा पर विस्तार से अपने विचार रखे।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. संजय अलंग ने कहा कि सुशासन का मूल आधार निषेध और वंचना से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि जितना अधिक अनावश्यक निषेधों को कम किया जाएगा और वंचनाओं को दूर किया जाएगा, उतना ही समाज में संतोष और खुशहाली बढ़ेगी। यही वास्तविक अर्थों में सुशासन है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सुशासन केवल नियमों और आदेशों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे सहभागितापूर्ण, जवाबदेह और संवेदनशील बनाना आवश्यक है। प्रशासन का उद्देश्य सिर्फ योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक उनका लाभ सुनिश्चित करना होना चाहिए। जब प्रशासन और समाज मिलकर कार्य करते हैं, तभी सुशासन की अवधारणा सार्थक होती है। डॉ. अलंग ने अधिकारियों से सुशासन के आठ मूल नियमों का पालन करते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया, ताकि विकास के लक्ष्य पूरे हों और समाज के सभी वर्गों का समावेशी विकास हो सके।

इस अवसर पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि डॉ. संजय अलंग एक अनुभवी और संवेदनशील प्रशासक रहे हैं, जिनके प्रशासनिक अनुभव से जिले के अधिकारियों को दिशा और मार्गदर्शन मिलेगा। उन्होंने जिले में सुशासन के तहत किए जा रहे नवाचारों की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस विभाग द्वारा “चेतना” अभियान चलाया जा रहा है, जिसके माध्यम से नशा उन्मूलन के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। कलेक्टर ने शिक्षा विभाग की स्मार्ट क्लास, उद्यानिकी विभाग सहित अन्य विभागों के नवाचारों पर भी प्रकाश डाला और जिले के विकास के लिए प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुशासन सप्ताह के अंतर्गत गांव-गांव में समाधान शिविर आयोजित कर आम जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने कानून व्यवस्था, जनभागीदारी और कम्युनिटी पुलिसिंग के महत्व पर विचार रखते हुए कहा कि बेहतर कानून व्यवस्था के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। “चेतना” कार्यक्रम के माध्यम से नशा उन्मूलन, साइबर फ्रॉड और महिला सुरक्षा जैसे विषयों पर जागरूकता बढ़ी है, जिससे पुलिस और नागरिकों के बीच विश्वास मजबूत हुआ है।
सीईओ जिला पंचायत संदीप अग्रवाल ने बताया कि जल संरक्षण के क्षेत्र में जिले को मिले सम्मान कलेक्टर के मार्गदर्शन में किए गए नवाचारों का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लिए जल संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है।
कार्यक्रम में नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे, एडीएम शिवकुमार बनर्जी, अपर कलेक्टर ज्योति पटेल सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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