अवैध निर्माण पर सियासी संग्राम CMO ने दिया नोटिस… नपाध्यक्ष ने उसी दुकान का किया उद्घाटन

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मुंगेली में अवैध निर्माण को संरक्षण देने के आरोप, भाजपा सरकार कटघरे में जनता में भारी आक्रोश, जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल

मुंगेली । मुंगेली नगर पालिका एक बार फिर अवैध निर्माण, अनियमितता और कथित संरक्षण को लेकर विवादों के घेरे में आ गई है। शहर के सबसे व्यस्त और व्यावसायिक क्षेत्र — मुख्य मार्ग चौक, पुराना बस स्टैंड के पास — किए गए एक कथित अवैध निर्माण ने प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला तब और गर्मा गया जब जिस निर्माण को लेकर नगर पालिका के सीएमओ ने नोटिस जारी किया, उसी दुकान का नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा फीता काटकर उद्घाटन किए जाने की बात सामने आई।


जनदर्शन में शिकायत, जांच की मांग

सरदार पटेल वार्ड निवासी किशोर बैरागी ने कलेक्टर, जिला मुंगेली को जनदर्शन के माध्यम से लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की विधिसंगत जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के अनुसार सीट नं. 38/सी, भू-खण्ड क्रमांक 45/1 में से लगभग 2000 वर्गफुट भूमि पर दुकान एवं मकान का निर्माण कराया गया है। यह भूमि पुराना बस स्टैंड के समीप स्वर्ण जयंती स्तंभ से लगी हुई है, जो नगर की अत्यंत महत्वपूर्ण और सार्वजनिक लोकेशन मानी जाती है।


नियमों की अनदेखी का आरोप

शिकायत में उल्लेख किया गया है कि उक्त भू-खण्ड रुचि जैन (पति – गौतमचंद जैन) के नाम से रजिस्टर्ड बताया जा रहा है, लेकिन जिस तरीके से निर्माण कराया गया है, वह नगर पालिका के नियमों के विपरीत और अवैधानिक प्रतीत होता है।
आवेदक का आरोप है कि निर्माण के दौरान नक्शा स्वीकृति, भवन अनुज्ञा और भूमि की वैधानिक स्थिति की या तो जांच नहीं की गई या फिर नियमों को दरकिनार कर निर्माण कराया गया। इससे न केवल शासन और नगर पालिका को आर्थिक क्षति पहुंचने की बात कही गई है, बल्कि शासकीय/नजूल भूमि पर अतिक्रमण की आशंका भी जताई गई है।


नगर पालिका ने माना नियम विरुद्ध निर्माण

मामले में नगर पालिका परिषद मुंगेली ने भी प्रारंभिक स्तर पर नियम उल्लंघन की पुष्टि की है। नगर पालिका द्वारा जारी सूचना के अनुसार, स्वीकृत भवन अनुज्ञा से अधिक क्षेत्र में निर्माण किया गया है, जो नगर पालिका अधिनियम 1961 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।

नगर पालिका परिषद मुंगेली द्वारा 01 जनवरी 2026 को जारी नोटिस (क्र. 34/4/न.पा./भ.नि.शा./2025-26)
में श्रीमती रुचि जैन को निर्देशित किया गया है कि वे 02 दिवस के भीतर अतिरिक्त निर्माण से संबंधित वैध अनुमति और दस्तावेज प्रस्तुत करें।

नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब या अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में अवैध निर्माण को तोड़ने की कार्रवाई की जाएगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित पक्ष की होगी।


राजनीतिक मोड़: नोटिस के बावजूद उद्घाटन

इस पूरे मामले ने तब राजनीतिक तूल पकड़ लिया, जब यह सामने आया कि जिस भवन को लेकर सीएमओ ने नोटिस जारी किया है, उसी दुकान का नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा उद्घाटन किया गया। इस घटना के बाद शहर में आक्रोश का माहौल है और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण अवैध था, तो उसका उद्घाटन किस आधार पर किया गया? क्या यह अवैध निर्माण को खुला संरक्षण नहीं है? इन सवालों के साथ ही भाजपा सरकार और नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों को भी कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।


जनता में नाराजगी, कार्रवाई की मांग

नगरवासियों का कहना है कि छोटे निर्माणों पर तत्काल कार्रवाई करने वाला प्रशासन, प्रभावशाली लोगों के मामलों में नरमी क्यों दिखा रहा है। अवैध निर्माण को शह देने वाले अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।


अधिकारियों के बयान

“संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया है। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब या वैध दस्तावेज नहीं मिलते हैं, तो अंतिम नोटिस के बाद नियमानुसार तोड़ने की कार्रवाई की जाएगी।”
होरी सिंह, सीएमओ, नगर पालिका मुंगेली

“नोटिस जारी होने के बावजूद नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं होगा। मामले में जल्द ही सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
जयप्रकाश मिश्रा, उपाध्यक्ष, नगर पालिका मुंगेली


अब सबकी नजर प्रशासन पर

बहरहाल, अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और नगर पालिका इस मामले में निष्पक्ष और ठोस कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। मुंगेली की जनता को जवाब चाहिए — कानून सबके लिए बराबर है या नहीं?

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