सोनकर कॉलेज में 17-18 जनवरी को 19वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी मुंगेली के शैक्षणिक इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आयोजन

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मुंगेली। सोनकर कॉलेज, मुंगेली में 17 एवं 18 जनवरी को आयोजित होने जा रही 19वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी जिले के शैक्षणिक और बौद्धिक इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आयोजन साबित होगी। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से शिक्षाविद, शोधार्थी, सामाजिक चिंतक एवं साहित्यकार भाग लेंगे। संगोष्ठी का शुभारंभ 17 जनवरी को प्रातः होगा।

संगोष्ठी का उद्घाटन पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलपति डॉ. व्ही.के. सारस्वत के मुख्य आतिथ्य में संपन्न होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं थावे विद्यापीठ, गोपालगंज (बिहार) के कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक करेंगे।

विशिष्ट अतिथियों की रहेगी गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति चंद्र भूषण वाजपेई, अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री मदन मोहन अग्रवाल, सोनकर कॉलेज के संस्थापक संतुलाल सोनकर एवं डायरेक्टर शिव आशीष सोनकर विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

पहले दिन होंगे तकनीकी सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम

संगोष्ठी समन्वयक डॉ. गजेंद्र तिवारी ने बताया कि 17 जनवरी को प्रातः 9.30 बजे से प्रतिभागियों का पंजीयन किया जाएगा। पूर्वाह्न 11 बजे उद्घाटन समारोह के साथ तकनीकी सत्रों का शुभारंभ होगा।
दोपहर 12.30 से 2 बजे तक प्रथम तकनीकी सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता डॉ. सुरेश माहेश्वरी (अमलनेर, महाराष्ट्र) करेंगे। इस सत्र में झांसी के डॉ. रामशंकर भारती सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वान अपने शोध पत्र और विचार प्रस्तुत करेंगे।

दोपहर 3 से 5 बजे तक विकलांग विमर्श विषय पर केंद्रित द्वितीय तकनीकी सत्र आयोजित होगा। शाम 5 से 6 बजे तक राष्ट्रीय विकलांग पारक कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इसके पश्चात शाम 6 से 7.30 बजे तक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन होगा, जिसमें सोनकर कॉलेज के छात्र-छात्राएं अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे।

दूसरे दिन शोध आलेख व पुस्तक विमोचन

संगोष्ठी के द्वितीय दिवस रविवार 18 जनवरी को प्रातः 10 बजे से तृतीय तकनीकी सत्र आयोजित किया जाएगा। इसके बाद समापन समारोह में देशभर से आए शोधार्थी अपने-अपने शोध आलेखों का वाचन करेंगे।
इसी अवसर पर डॉ. अनीता सिंह एवं अनुपमां दास द्वारा लिखित पुस्तक “विकलांग विमर्श की कहानी – भाग दो” का विमोचन भी किया जाएगा।

मुंगेली को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान

आयोजकों के अनुसार यह संगोष्ठी मुंगेली में पहली बार इतने बड़े स्तर पर राष्ट्रीय स्वरूप में आयोजित की जा रही है। इससे न केवल शैक्षणिक एवं सामाजिक विमर्श को नई दिशा मिलेगी, बल्कि मुंगेली जिले को राष्ट्रीय बौद्धिक मानचित्र पर एक नई और सशक्त पहचान भी प्राप्त होगी।


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