मुंगेली की शिक्षिका की आवाज़ बनी दृष्टिबाधित बच्चों की पढ़ाई का सहारा


रायपुर लोकभवन में 2 ब्रेल पुस्तकों व 3100 से अधिक ऑडियो बुक्स का विमोचन
राज्यपाल ने की पहल की सराहना, मुंगेली की परवीन बेबी दिवाकर का उल्लेखनीय योगदान


मुंगेली । छत्तीसगढ़ के जिले मुंगेली से उठी एक संवेदनशील पहल आज प्रदेशभर के दृष्टिबाधित बच्चों की शिक्षा का मजबूत आधार बन रही है। राजधानी रायपुर के लोकभवन, सिविल लाइन में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में 2 ब्रेल पुस्तकों एवं 3100 से अधिक ऑडियो बुक्स का विमोचन किया गया, जिसमें मुंगेली जिले की शिक्षिका परवीन बेबी दिवाकर की सक्रिय सहभागिता विशेष रूप से सराही गई।

महामहिम राज्यपाल रमेन डेका के करकमलों द्वारा “दिव्यांग महिलाओं की सफलता की कहानी” एवं “छत्तीसगढ़ के वीर” शीर्षक ब्रेल पुस्तकों का विमोचन किया गया। साथ ही दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई 3100 से अधिक ऑडियो बुक्स भी जारी की गईं।
मुंगेली से राष्ट्रीय स्तर तक पहुँची शिक्षा की आवाज़
इस व्यापक शैक्षणिक अभियान में प्रदेश के 30 से अधिक शिक्षकों ने सहभागिता निभाई, जिनमें मुंगेली जिले से परवीन बेबी दिवाकर का योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने स्पष्ट उच्चारण और बच्चों को आसानी से समझ आने वाली शैली में ऑडियो बुक्स तैयार कीं, जिससे दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को अध्ययन में विशेष सुविधा मिल रही है।
मुंगेली जैसे अपेक्षाकृत छोटे जिले से किसी शिक्षिका का इस स्तर के राज्यव्यापी और भविष्य में राष्ट्रीय विस्तार वाले अभियान का हिस्सा बनना जिले के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।
एक मंच पर पूरी पढ़ाई की सुविधा : विमोचित ऑडियो बुक्स में कक्षा छठवीं से बारहवीं तक के सभी विषयों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु विशेष प्लेलिस्ट उपलब्ध कराई गई है। इनमें छत्तीसगढ़ी, हिंदी, हल्बी, पंजाबी भाषाओं की सामग्री, सरगुजिया कहानियां, सामान्य ज्ञान, महिला सशक्तिकरण एवं दिव्यांगजनों को मिलने वाली शासकीय योजनाओं से संबंधित उपयोगी जानकारियां भी शामिल हैं। इन सभी ऑडियो सामग्रियों को वर्ल्ड ऑडियो बुक यूट्यूब चैनल पर निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है, जिससे प्रदेश के दूर-दराज़ क्षेत्रों के दृष्टिबाधित विद्यार्थी भी लाभान्वित हो सकें।
सेवा भावना से शुरू हुआ अभियान : इस अभियान की शुरुआत वर्ष 2024 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित दुर्ग जिले की शिक्षिका के. शारदा द्वारा की गई थी। उन्होंने दृष्टिबाधित बच्चों की आवश्यकता को समझते हुए शिक्षा को ऑडियो माध्यम में उपलब्ध कराने की पहल की। प्रारंभ में स्वयं 800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार की गईं, बाद में विभिन्न जिलों के शिक्षकों को जोड़कर इसे एक जनआंदोलन का रूप दिया गया।
राज्यपाल ने की भूरी-भूरी प्रशंसा : राज्यपाल रमेन डेका ने इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास समावेशी शिक्षा की सशक्त मिसाल हैं। उन्होंने ब्रेल पुस्तकों को अन्य राज्यों की वेबसाइट्स पर भी उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई, ताकि देशभर के दृष्टिबाधित लोग इनका लाभ ले सकें।
मुंगेली के लिए गर्व का क्षण : मुंगेली जिले की शिक्षिका की सहभागिता ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सेवा भावना और समर्पण के बल पर शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। यह पहल न केवल दृष्टिबाधित बच्चों के भविष्य को रोशन कर रही है, बल्कि मुंगेली को प्रदेश और देश के शैक्षणिक मानचित्र पर भी सशक्त पहचान दिला रही है।

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