एक घर, दो अनुकंपा, वही अफसर, वही सिस्टम: शिक्षा विभाग के घोटाले पर अंकित गौराहा का हमला, कमिश्नर से स्वतंत्र जांच की मांग


रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
बिलासपुर । शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर चल रहे कथित खेल ने प्रशासनिक ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेता अंकित गौराहा ने पूरे मामले को “संगठित भ्रष्टाचार” करार देते हुए कमिश्नर को लिखित शिकायत सौंपी है और साफ कहा है कि यदि जांच ज्वाइंट डायरेक्टर शिक्षा या कमिश्नर स्तर पर नहीं हुई, तो मामला डीपी और सचिव स्तर तक ले जाया जाएगा। जरूरत पड़ी तो आंदोलन और धरना भी होगा।



अंकित गौराहा के मुताबिक इस पूरे प्रकरण में सिर्फ लिपिक सुनील यादव ही नहीं, बल्कि तत्कालीन और वर्तमान पदस्थ जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। इसके बावजूद जिला प्रशासन के आदेश पर खुद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा दो खंड शिक्षा अधिकारियों को जांच सौंपना, जांच की निष्पक्षता को शुरू से ही कमजोर करता है।

एक ही परिवार में दो अनुकंपा
प्रेस नोट में दर्ज तथ्यों के अनुसार शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को ताक पर रखकर एक ही घर की दो सगी बहनों को नियुक्ति दी गई। शिकायत में उल्लेख है कि मृत कर्मचारी की पहली पत्नी की संतान यश साहू को अनुकंपा नियुक्ति दी गई, जबकि नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि एक परिवार से केवल एक ही अनुकंपा नियुक्ति वैध है। इसके बावजूद बाद में दूसरी पत्नी के पुत्र को भी अनुकंपा नियुक्त कर दिया गया।
शिकायत के अनुसार यह नियुक्तियां लिपिक सुनील यादव की भूमिका और कथित लेन-देन के बाद कराई गईं। सुनील यादव वर्तमान में स्थापना शाखा से जुड़े कार्यों में प्रभावी भूमिका में पदस्थ बताया गया है, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे उस समय और वर्तमान में भी विभागीय निर्णय प्रक्रिया के शीर्ष पर रहे हैं।
पदोन्नति, वेतन और संलग्नीकरण
प्रेस नोट में यह भी दर्ज है कि वर्ष 2021 और 2022 में नियमों के विरुद्ध पदोन्नतियां की गईं। सहायक ग्रेड-03 से सहायक ग्रेड-02 के पद पर पदोन्नति दी गई, जबकि संबंधित कर्मचारियों की पात्रता और पद स्वीकृति स्पष्ट नहीं थी। इसके बावजूद वर्षों तक वेतन आहरण कराया गया और आज तक उन पदोन्नतियों को निरस्त नहीं किया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कार्यालयों में स्वीकृत पदों से अधिक कर्मचारियों को संलग्न रखा गया, जबकि स्कूलों में शिक्षक और स्टाफ की भारी कमी बनी रही। इस संलग्नीकरण की प्रक्रिया में भी सुनील यादव की भूमिका बताई गई है, जिन पर पहले भी वेतन और नियुक्ति से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं।
मासिक वसूली और संरक्षण
अंकित गौराहा ने प्रेस नोट में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कार्यालयों में पदस्थ शिक्षकों, बाबुओं और चपरासियों से मासिक अवैध वसूली की जाती रही—
शिक्षकों से 10 हजार, बाबुओं से 5 हजार और चपरासियों से 2 हजार रुपये प्रतिमाह।
यह वसूली कथित तौर पर पदस्थापन, संलग्नीकरण और पदोन्नति के एवज में की जाती थी।
जांच पर ही सवाल
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि लोक शिक्षण संचालनालय स्तर पर पूर्व में हुई जांच में सुनील यादव दोषी पाए गए, लेकिन न तो प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई हुई और न ही अवैध पदोन्नतियां और नियुक्तियां निरस्त की गईं। अब जबकि शिकायत में जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे का नाम भी शामिल है, उसी कार्यालय के अधीन खंड शिक्षा अधिकारियों से जांच कराना “जांच को प्रभावित करने जैसा कदम” बताया गया है।
अंकित गौराहा ने स्पष्ट कहा कि यदि निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई तो वे इसे राज्य स्तर तक ले जाएंगे। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ अनुकंपा नियुक्ति का नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग में जड़ जमाए बैठे संरक्षित भ्रष्ट तंत्र का है, जिसे बेनकाब करना जरूरी है




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