पी.एम. श्री स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में स्कूल सॉयल हेल्थ पायलट प्रोजेक्ट संपन्न। पिपरिया व सहसपुर लोहारा में विद्यार्थियों को मिला मृदा स्वास्थ्य का व्यावहारिक प्रशिक्षण


रिपोर्टर ✒️ कमलेश सिंह
कवर्धा। पायलट प्रोजेक्ट ऑन स्कूल सॉयल हेल्थ कार्यक्रम के अंतर्गत आज पीएम श्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय पिपरिया एवं पीएम श्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सहसपुर लोहारा में मृदा स्वास्थ्य विषय पर प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली छात्र-छात्राओं को मृदा संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा वैज्ञानिक खेती की बुनियादी जानकारी प्रदान करना रहा।


कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को मृदा स्वास्थ्य से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी गई, जिसमें मृदा नमूना एकत्रीकरण, मृदा विश्लेषण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड का महत्व तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर रासायनिक उर्वरकों के संतुलित प्रयोग की विस्तृत जानकारी शामिल रही। विशेषज्ञों ने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति से मृदा परीक्षण कर खेती करने से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत में भी कमी लाई जा सकती है।

कार्यक्रम के अंतर्गत वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख कृषि विज्ञान केंद्र नेवारी डॉ. बी.पी. त्रिपाठी, विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. बी.एस. परिहार एवं एन.सी. बंजारा द्वारा विद्यार्थियों को सॉयल हेल्थ कार्ड के संबंध में व्याख्यान दिया गया। इस दौरान मृदा नमूना संग्रहण की सही विधि, नमूना विश्लेषण, संतुलित मात्रा में उर्वरक उपयोग तथा फसल चयन के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई।
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सौरभ झा ने छात्रों को बताया कि मृदा में जैविक खाद तथा संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ खेती की लागत को कैसे कम किया जा सकता है। वहीं कृषि विभाग से डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर (आत्मा) सुशील कुमार वर्मा ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन एवं स्कूल सॉयल हेल्थ कार्ड योजना की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
प्रयोगशाला सहायक कीर्ति सलूजा एवं जानकी दीवान द्वारा विद्यार्थियों को मृदा नमूना विश्लेषण का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान बच्चों को मृदा पीएच विश्लेषण सहित कुल 12 प्रमुख मृदा पैरामीटर की जानकारी दी गई, जिससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित हुआ।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों के साथ कृषि विषय पर संवाद किया गया तथा मृदा परीक्षण के महत्व को सरल भाषा में समझाया गया। साथ ही जिला कबीरधाम की भौगोलिक मृदा संरचना के विषय में भी स्कूली छात्र-छात्राओं से चर्चा की गई। कार्यक्रम में दोनों विद्यालयों के प्राचार्य सहित शिक्षकगण उपस्थित रहे और उन्होंने इस पहल को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

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