एनएमडीसी की कौशल पहल से बस्तर के 80 युवाओं को मिला रोजगार

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प्रशिक्षण पूरा करते ही 100 प्रतिशत प्लेसमेंट, आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

जगदलपुर/रायपुर । भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी एनएमडीसी लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के युवाओं के लिए कौशल विकास के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। एनएमडीसी की रोजगार-उन्मुख कौशल प्रशिक्षण पहल के अंतर्गत प्रशिक्षित 80 युवाओं के पहले बैच को शत-प्रतिशत रोजगार मिला है। यह उपलब्धि न केवल युवाओं के जीवन में बदलाव लाने वाली है, बल्कि आत्मनिर्भर बस्तर की दिशा में एक अहम मील का पत्थर भी मानी जा रही है।

एनएमडीसी के इस कार्यक्रम को कंपनी के सीएसआर प्रयासों के तहत केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईपीईटी) के सहयोग से संचालित किया गया। इस पहल का उद्देश्य बस्तर क्षेत्र के बेरोजगार और वंचित आदिवासी युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रदान कर उन्हें स्थायी आजीविका से जोड़ना रहा।

प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले युवाओं के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में एनएमडीसी के शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे। अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी, निदेशक (तकनीकी) एवं निदेशक (वाणिज्यिक, अतिरिक्त प्रभार) विनय कुमार, निदेशक (उत्पादन) एवं निदेशक (कार्मिक, अतिरिक्त प्रभार) जॉयदीप दासगुप्ता, महाप्रबंधक (सीएसआर) पी. श्याम तथा सीआईपीईटी के प्रधान निदेशक बी. रवि सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

दंतेवाड़ा, बस्तर, सुकमा, नारायणपुर, कोंडागांव और बीजापुर जैसे जिलों से आए युवाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सीमित अवसरों और कठिन परिस्थितियों के बीच यह प्रशिक्षण उनके लिए नई राह लेकर आया है। युवाओं ने कहा कि इस कार्यक्रम ने न सिर्फ रोजगार दिया, बल्कि अपने गांव से बाहर निकलकर आत्मविश्वास के साथ जीवन संवारने का हौसला भी दिया।

बस्तर के युवक सुखराम ने भावुक होकर बताया कि कठिन बचपन और सीमित साधनों के बावजूद आज उन्हें नौकरी मिली है, जिससे उनके परिवार का भविष्य बदल सकेगा। उन्होंने कहा कि अब वे अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे।

इस अवसर पर एनएमडीसी के अध्यक्ष अमिताभ मुखर्जी ने कहा कि बस्तर के युवाओं को औपचारिक रोजगार में प्रवेश करते देखना यह साबित करता है कि सही अवसर जीवन की दिशा बदल सकता है। यह केवल नौकरियों की बात नहीं, बल्कि युवाओं को देश की विकास यात्रा का हिस्सा बनाने का प्रयास है।

निदेशक विनय कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हो रहे सकारात्मक बदलावों में एनएमडीसी की भूमिका निरंतर रही है, वहीं निदेशक जॉयदीप दासगुप्ता ने इसे युवाओं के जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए उन्हें आगे बढ़ते रहने और उद्यमिता की ओर भी कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

गौरतलब है कि इस कार्यक्रम में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता कक्षा 8 रखी गई, ताकि स्कूल छोड़ चुके और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवा भी इससे वंचित न रहें। पहले बैच के सभी 80 प्रशिक्षुओं को रोजगार मिलना इस योजना की सफलता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।

एनएमडीसी-सीआईपीईटी साझेदारी के तहत आने वाले समय में दंतेवाड़ा और बस्तर जिलों के कुल 500 युवाओं को निशुल्क कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे स्थानीय युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।

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