वन्यजीव संरक्षण में सह-अस्तित्व और न्यूनतम हस्तक्षेप की नीति अपनाई जाए : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय


रायपुर । वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर देते हुए ने कहा कि वनों और वन्यजीवों से जुड़े सभी कार्य सह-अस्तित्व के सिद्धांतों के अनुरूप ही संचालित किए जाने चाहिए। मुख्यमंत्री श्री साय की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की 16वीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें पूर्व बैठक के पालन प्रतिवेदन और नए एजेंडों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं और उनके संरक्षण व संवर्धन के लिए शासन, समाज और स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयास अनिवार्य हैं। उन्होंने वन्यजीव सुरक्षा के लिए सतत निगरानी, अवैध शिकार और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाने तथा जनभागीदारी को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। साथ ही वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों में जागरूकता फैलाने और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।

स्थायी समिति के गठन को मंजूरी

बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (Standing Committee of State Board for Wildlife) के गठन को स्वीकृति दी गई। यह समिति वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री की अध्यक्षता में गठित होगी, जिसमें 11 अन्य सदस्य शामिल रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य प्राणियों की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में प्रस्तावित कार्यों के लिए राज्य वन्यजीव बोर्ड की अनुशंसा अनिवार्य होती है, लेकिन बैठकों के बीच लंबे अंतराल के कारण कई बार निर्णयों में देरी हो जाती है। स्थायी समिति के गठन से वैधानिक मंजूरियों का त्वरित निपटारा होगा और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान संभव हो सकेगा।

महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति
बैठक में उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व अंतर्गत बरबांधा जलाशय में बांध एवं नहरों के जीर्णोद्धार व नवीन निर्माण कार्य, पीएम जनमन योजना के तहत कबीरधाम जिले के कवर्धा वनमंडल में पंडरीपानी मेन रोड से सौरु तक मार्ग मजबूतीकरण, गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने से जुड़े छह प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इसके अलावा सेमरसोत अभ्यारण्य में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने, उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में सीआरपीएफ कैंप की स्थापना तथा वहां ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क विस्तार के प्रस्तावों को भी मंजूरी देते हुए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्वीकृति हेतु भेजने पर सहमति बनी।
वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में वन मंत्री , विधायक , मुख्य सचिव , अपर मुख्य सचिव , प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख , प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सहित बोर्ड के अन्य सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में लिए गए निर्णयों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार विकास कार्यों के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण को भी समान प्राथमिकता दे रही है। सह-अस्तित्व और न्यूनतम हस्तक्षेप की नीति के जरिए छत्तीसगढ़ में वन्यजीव प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

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