गुड फ्राइडे पर मुंगेली में विशेष आराधना, प्रभु यीशु के बलिदान को किया गया श्रद्धापूर्वक स्मरण
• जराहगांव के पेंड्रीडीह चर्च सहित जिलेभर में प्रार्थना सभाएं, सात वाणियों पर मनन के साथ विश्व शांति और भाईचारे का संदेश
मुंगेली । मुंगेली जिले में गुड फ्राइडे (शुभ शुक्रवार) का पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और गंभीरता के साथ मनाया गया। जिले के सभी गिरजाघरों एवं प्रार्थना भवनों में विशेष आराधना सभाएं आयोजित की गईं, जहां मसीही समाज के लोगों ने प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर दिए गए बलिदान को स्मरण करते हुए प्रार्थना, उपवास और भजन-कीर्तन किया। इस अवसर पर वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक और भक्तिमय बना रहा।

जिले के जराहगांव स्थित ख्रीस्टीयान मंडली पेंड्रीडीह चर्च में दोपहर 12 बजे से विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मसीही श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर कहे गए सात वचनों (सात वाणियों) का श्रवण, मनन और चिंतन किया। इन वचनों के माध्यम से प्रेम, क्षमा, त्याग और मानवता का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान कलीसिया के सदस्यों द्वारा सात वाणियों पर आधारित विशेष प्रस्तुति दी गई, जिसमें प्रत्येक वचन के बीच भक्ति गीत और प्रार्थना का क्रम चला। पूरी सभा में अनुशासन, शांति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने प्रभु यीशु के बलिदान को याद करते हुए अपने जीवन में उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
मुख्य वक्ता रेवरेंट मनीष कुमार लाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुड फ्राइडे मसीही समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि इसी दिन प्रभु यीशु मसीह ने समस्त मानव जाति के पापों के उद्धार के लिए क्रूस पर अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने बताया कि क्रूस पर कहे गए सात वचन केवल धार्मिक संदेश ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु का बलिदान प्रेम, क्षमा और त्याग का सर्वोच्च उदाहरण है, जो आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान दौर में भी मसीही समाज के लिए यह दिन आत्मचिंतन और समर्पण का प्रतीक है। जिस प्रकार प्रभु यीशु ने मानवता के लिए कष्ट सहन किए, उसी प्रकार हमें भी समाज में प्रेम, सहिष्णुता और सेवा की भावना को बढ़ावा देना चाहिए।
स्थानीय पास्टर रॉड्रिक जॉन ने बताया कि गुड फ्राइडे मसीही धर्म में अत्यंत पवित्र और भावनात्मक दिन होता है। इस दिन प्रभु यीशु मसीह ने समस्त मानव जाति के पापों की क्षमा के लिए क्रूस पर बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल शोक का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और पश्चाताप का भी है, जहां लोग अपने जीवन की गलतियों को स्वीकार कर ईश्वर से क्षमा मांगते हैं।
उन्होंने बताया कि बीते 40 दिनों तक मसीही समाज के लोगों ने उपवास और प्रार्थना के माध्यम से इस दिन की तैयारी की थी। यह अवधि ‘लेंट’ के रूप में जानी जाती है, जिसमें श्रद्धालु आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना करते हैं। अब गुड फ्राइडे के बाद मसीही समाज पुनरुत्थान पर्व (ईस्टर) की तैयारी में जुट गया है, जिसे अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
कार्यक्रम में कलीसिया की क्वायर लीडर एंजेल भारत ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुड फ्राइडे के दिन प्रभु यीशु को क्रूस पर चढ़ाया गया था, लेकिन उन्होंने अपने कष्टों के माध्यम से संपूर्ण मानव जाति को पापों से मुक्ति दिलाई। उन्होंने कहा कि यह दिन हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम और त्याग क्या होता है।
पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने देश और दुनिया में शांति, आपसी प्रेम और भाईचारे के लिए विशेष प्रार्थना की। सभी ने एक स्वर में मानवता की भलाई और समाज में सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया।
जिले के अन्य चर्चों और प्रार्थना भवनों में भी इसी प्रकार विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं, जहां श्रद्धालुओं ने प्रभु यीशु मसीह के बलिदान को याद करते हुए आस्था और श्रद्धा के साथ गुड फ्राइडे मनाया। इस अवसर पर पूरे जिले में धार्मिक वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष अनुभव किया गया।

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