पाठ्य पुस्तक वितरण में लापरवाही पर निजी स्कूल संचालकों का हल्ला बोल, 5 जुलाई तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो राजधानी में उग्र आंदोलन
मुंगेली। छत्तीसगढ़ राज्य पाठ्य पुस्तक निगम की कथित लापरवाही, हठधर्मिता और अड़ियल रवैये के खिलाफ अब निजी स्कूल संचालकों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। अशासकीय विद्यालय संचालक संघ, मुंगेली ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई करने तथा अशासकीय विद्यालयों को संकुल स्तर पर पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने की मांग की है।
संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक मांगें पूरी नहीं की गईं तो प्रदेशभर के निजी स्कूल संचालक, शिक्षक और पालक राजधानी रायपुर में व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
पिछले सत्र से ही बिगड़ी व्यवस्था, सितंबर तक नहीं मिली थीं किताबें

संघ के जिला अध्यक्ष नर्बद कुमार कश्यप, सचिव सोमनाथ बंजारे तथा अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि सत्र 2025-26 में भी पाठ्य पुस्तक वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। स्कूलों को पुस्तकें अत्यधिक विलंब से मिलीं और कई संस्थानों को सितंबर 2025 तक भी पूर्ण पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकीं। कुछ विषयों की पुस्तकें तो पूरे शैक्षणिक सत्र में नहीं पहुंचीं।
संघ का आरोप है कि पूर्व में संचालित सुगम वितरण व्यवस्था को समाप्त कर केवल 6 डिपो के माध्यम से आधी-अधूरी पुस्तकों का वितरण किया गया, जिससे विद्यार्थियों के साथ-साथ शासन की छवि भी प्रभावित हुई।
बारकोड स्कैनिंग बनी नई परेशानी
संघ ने आरोप लगाया कि पुस्तकों पर बारकोड स्कैनिंग की नई व्यवस्था ने वितरण प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है। स्कूल संचालकों के अनुसार, पुस्तकें प्राप्त होने के बाद भी 10-10 दिनों तक स्कैनिंग की प्रक्रिया में समय नष्ट हो रहा है, जिससे शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
नया शैक्षणिक सत्र 16 जून 2026 से प्रारंभ हो चुका है, जबकि इस वर्ष बोर्ड परीक्षाएं भी फरवरी में प्रस्तावित हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को अब तक पाठ्य पुस्तकें नहीं मिल पाई हैं। संचालकों का कहना है कि किताबों के बिना गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई संभव नहीं है।
25 जून को प्रदर्शन, 5 जुलाई तक अल्टीमेटम
संघ ने छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए आंदोलन की रणनीति भी स्पष्ट कर दी है। इसके तहत 25 जून को प्रदेश के सभी अशासकीय विद्यालयों में अध्यापन कार्य बंद कर जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन किया गया।
संघ ने अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि 5 जुलाई 2026 तक सभी अशासकीय विद्यालयों को संकुल स्तर पर पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो पूरे छत्तीसगढ़ के निजी स्कूल संचालक, शिक्षक और पालक मिलकर राजधानी रायपुर में उग्र आंदोलन करेंगे।
संघ की प्रमुख मांगें
अशासकीय विद्यालय संचालक संघ ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—
शासकीय विद्यालयों की तरह अशासकीय विद्यालयों को भी संकुल स्तर पर निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें वितरित की जाएं।
बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले पाठ्य पुस्तक निगम के दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए।
दूरस्थ डिपो व्यवस्था समाप्त कर स्थानीय स्तर पर सरल वितरण प्रणाली लागू की जाए।
ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष राजा पांडेय, कलेक्टर मुंगेली तथा जिला शिक्षा अधिकारी को भी भेजी गई है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान मुंगेली, लोरमी और पथरिया ब्लॉक के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में अशासकीय विद्यालय संचालक उपस्थित रहे। अब सबकी निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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