कपिलधारा में बिगड़ती स्वच्छता पर विशेष पहल नर्मदा समग्र का वृहद अभियान जारी

0
IMG-20251210-WA1008.jpg

संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक । मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक पतित-पावनी मां नर्मदा की जन्मस्थली जो प्रकृति की गोद में स्थित मनोहर स्थल कपिलधारा जैसे क्षेत्र अपने आध्यात्मिक तथा पर्यावरणीय सौन्दर्य के लिए विशेष प्रसिद्ध है । यहां पर मां नर्मदा जलप्रपात के रूप में कल कल करती हुई बहती हैं । कपिल मुनि एवं दुर्वासा ऋषि की तपोस्थली होने के कारण यह स्थान प्राचीनकाल से साधना और चिंतन का केंद्र रहा है ।

कभी यह स्थल इतना स्वच्छ और निर्मल हुआ करता था कि कोई भी श्रद्धालु या पर्यटक निर्बाध रूप से बैठकर मां नर्मदा की पावन धारा और प्राकृतिक सौन्दर्य का आनंद ले सकता था लेकिन वर्तमान में यहां बढ़ती गंदगी पर्यटकों को व्याकुल कर रही है । यदि यह स्थिति नहीं बदली तो आने वाले समय में यह पवित्र प्रपात कचरा डंपिंग ज़ोन में बदलने का बड़ा खतरा है ।

नर्मदा समग्र का स्वच्छता अभियान जारी

पिछले एक माह से नर्मदा समग्र द्वारा कपिलधारा में वृहद स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है ।

प्रतिदिन की तरह इस सप्ताह भी भारी मात्रा में कचरा नदी से बाहर निकाला गया जिसमें पानी की बोतलें हजारों की संख्या में जलधारा और आसपास के किनारों से निकली गई है ।

सभी प्रकार का प्लास्टिक (प्लेट, ग्लास, चम्मच, रैपर आदि) — लगभग क्विंटल कचड़ा निकाला गया । जो इकट्ठा किया गया ताकि कचड़ा वाहन माध्यम से दूर दराज क्षेत्र में फिकवाया जाय ।

सेनेटरी वेस्ट भी कई किलो साथ ही अन्य मिश्रित कचरा भी निकाला गया । सबसे अधिक मात्रा में पानी की बोतलें , डिस्पोजल उपयोग की वस्तुएँ – मैगी/चिप्स/जलजीरा के रैपर पाए गए ।

गंदगी का मुख्य कारण

  1. अतिक्रमण:
    प्रशासन द्वारा यात्रियों की सुविधा हेतु बनाए गए यात्री-प्रतीक्षालयों पर स्थानीय दुकानदारों ने अतिक्रमण कर दुकानें बना ली हैं । दूसरा यह कि कुछ दुकानें जलप्रपात से केवल 20 मीटर की दूरी पर संचालित हो रही हैं । 2. डिस्पोजेबल सामग्री का बढ़ता उपयोग:
    दुकानों में मुख्य रूप से मैगी , चिप्स , जलजीरा आदि परोसे जाते हैं जिनके साथ डिस्पोजल प्लेट , ग्लास , चम्मच दिए जाते हैं । इससे प्रपात क्षेत्र में भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा जमा हो रहा है । 3. पेयजल का विकल्प न होना:
    केवल पैकेज् पानी की बोतल मिलने से बोतल कचरे में भारी वृद्धि हो रही है । 4. डस्टबिन का उपयोग नहीं:
    अधिकांश दुकानदार डस्टबिन का उपयोग न कर शाम को दुकान बंद करते समय सारा कचरा प्रपात की ओर फेंक देते हैं या रोड पर डाल दिया जाता है जैसे नगर के अंदर ।

पर्यावरण प्रेमियों की अपील

धर्म शास्त्रों में कहा गया है—
“अन्यक्षेत्रे कृतं पापं पुण्यक्षेत्रे विनश्यति ,
पुण्यक्षेत्रे कृतं पापं वज्रलेपो भविष्यति ।”
अर्थात—
अन्य स्थानों का पाप तीर्थस्थल में किए गए पुण्य से मिट जाता है किंतु तीर्थस्थल में किया गया पाप वज्रलेप की तरह स्थायी हो जाता है ।

मां नर्मदा केवल नदी नहीं बल्कि जीवनदायिनी माता हैं । उनका स्वच्छ निर्मल प्रवाह बनाए रखना प्रत्येक श्रद्धालु का धर्म है । सभी से अपील है कि कपिलधारा हो या अन्य पर्यटक स्थल जो अमरकंटक के किसी भी स्थल पर कचरा न फेंकें और प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में सहयोग दें ।

स्वच्छ नर्मदा अभियान
हर रविवार सुबह 10 बजे से आयोजित होता है जिसमें सभी को सहभागी बनने का अनुरोध है ।
नर्मदा स्वच्छ अभियान में सम्मिलित लोगों का कहना है कि जलप्रपात से लगभग 100 मीटर के दायरे में सभी अतिक्रमणयुक्त दुकानों को हटाया जाना उचित होगा ।

कपिलधारा एवं सोनमुड़ा में सरकारी पेयजल स्टेशन की व्यवस्था करना अति आवश्यक ।

टेट्रा पैक , डिस्पोजल ग्लास , चम्मच , पानी की बोतल आदि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए ।

प्रत्येक दुकान में डस्टबिन अनिवार्य रूप से हो अन्यथा जुर्माने का प्रावधान प्रभावशील बनाए । स्वच्छता के लिए समर्पित कर्मचारी नियुक्त किए जाएं । पर्यटकों को जागरूक करने हेतु निर्देशन बोर्ड लगाए जाएं ।

दिनेश कुमार साहू ने बताया कि इस अभियान में स्थानीय सामाजिक संगठनों के स्वयंसेवक , समाजसेवी , विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक , प्रोफेसर , शोधार्थी तथा समाजशास्त्र एवं सामाजिक कार्य के विद्यार्थी , पत्रकार लगातार योगदान दे रहे हैं ।

अमरकंटक नगर परिषद सीएमओ चैन सिंह परस्ते ने बताया कि डस्टबिन रखे हुए हैं कुछ जगहों पर और रखना है । जिन दुकानदारों द्वारा स्वच्छता और प्लास्टिक पन्नी पर लापरवाही बरत रहे उन पर कठोर कार्यवाही होगी ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

error: Content is protected !!