राजभाषा सम्मेलन में गूंजा छत्तीसगढ़ी साहित्य

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परवीन बेबी दिवाकर सहित मुंगेली के 21 साहित्यकारों ने किया काव्यपाठ

मुंगेली । छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा आयोजित नवां प्रांतीय सम्मेलन 10 एवं 11 जनवरी को सिम्स ऑडिटोरियम में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। दो दिवसीय इस आयोजन में प्रदेशभर से आए साहित्यकारों ने छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा को मंच पर जीवंत कर दिया। सम्मेलन का उद्घाटन पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विनय कुमार पाठक ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक धरमलाल कौशिक, विधायक सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी, डॉ. रमणेश मूर्ति, जिला पंचायत अध्यक्ष ज्वाला प्रसाद सूर्यवंशी एवं परदेशी राम वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही।

700 से अधिक साहित्यकारों की सहभागिता : दो दिवसीय इस प्रांतीय सम्मेलन में राज्य के विभिन्न जिलों से आए 700 से अधिक साहित्यकारों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ी भाषा की महत्ता, उसकी मिठास और लोक-संस्कृति पर विस्तार से चर्चा हुई। साहित्यकारों द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ी काव्यपाठ ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

मुंगेली जिले के साहित्यकारों ने बढ़ाया मान : सम्मेलन में मुंगेली जिले से 21 साहित्यकारों ने सहभागिता की। इनमें श्रीमती परवीन बेबी दिवाकर सहित डी.एल. भास्कर, प्रो. अशोक गुप्ता, राकेश गुप्त ‘निर्मल’, डॉ. सत्यनारायण तिवारी, रविंद्र कुर्रे, दुर्गा तिवारी, कृष्ण कुमार तिवारी, हंसदेव बांधड़े, रामा साहू, पुन्नुगौटिया, ज्वाला कश्यप, अनिल जांगड़े, नागेश कश्यप, रामगोपाल कश्यप, अशोक कुमार यादव, जगदीश देवांगन, संतोष वैष्णव, महेन्द्र यादव एवं श्रीमती सुधारानी शर्मा शामिल रहे।
सभी साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ी समाज, संस्कृति और संवेदनाओं को सशक्त रूप में प्रस्तुत किया।

साहित्यकारों का हुआ सम्मान : छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने सम्मेलन में सहभागी सभी साहित्यकारों को बैग, पेन, डायरी एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। साहित्यकारों ने ऐसे आयोजनों को छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

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