प्रकट से ज्यादा प्रबल होती हैं गुप्त नवरात्रि – रेणुका तिवारी


• (माघी गुप्त नवरात्रि विशेष पर खास बातचीत)
मथुरा वृंदावन । हिन्दू धर्म में माघ महीने का विशेष महत्व है। इस महीने पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि को भी बहुत ही खास माना जाता है। इस नवरात्रि में व्यक्ति विशेष तौर पर ध्यान-साधना करके दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करते हैं। गुप्त नवरात्रि खास तौर से तंत्र-मंत्र और सिद्ध- साधना आदि के लिये बहुत ही खास माना जाता है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये रेणुका तिवारी ने अरविन्द तिवारी ने बताया कि पूरे वर्ष में चार नवरात्रि आती है जिसमें चैत्र और आश्विन मास के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमीं तक दो प्रकट नवरात्रि होते हैं , इसी तरह माघ और आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमीं तक दो गुप्त नवरात्रि होती है। गुप्त नवरात्रि भी प्रकट नवरात्रि की तरह ही सिद्धिदायक होती है , बल्कि ये प्रकट नवरात्रि से भी ज्यादा प्रबल होती है। इस नवरात्रि को करने में साधक को पूर्ण संयम और शुद्धता के साथ मां भगवती की आराधना करनी चाहिये। इस वर्ष माघ गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू हो रहे हैं और इसका समापन 27 जनवरी को होगा। वहीं गुप्त नवरात्रि का पांचवा दिन अत्यंत ही शुभ माना गया है क्योंकि इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा बसंत पंचमी के दिन की जाती है। यह पर्व शीत ऋतु के बाद बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। गुप्त नवरात्रि की पूजा के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरुपों के साथ-साथ दस महाविद्यियाओं की भी पूजा का विशेष महत्व है। ये दस महाविद्यायें मां काली, तारा देवी , त्रिपुर सुंदरी , भुवनेश्वरी , छिन्नमस्ता , त्रिपर भैरवी , मां धूमावती , मां बगुलामुखी , मातंगी और कमला देवी हैं। इस दौरान मां की आराधना गुप्त रुप से की जाती है , इसलिये भी इन्हें गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस पाठ को करने से मां दुर्गा प्रसन्न होकर अपने भक्तों को मनोवांछित वरदान देती हैं। नवरात्रि में घर में लहसून , प्याज जैसे तामसिक चीजों का प्रयोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिये। गुप्त नवरात्रि का महत्व , प्रभाव और पूजा विधि बतानेने वाले ऋषियों में श्रृंगी ऋषि का नाम सबसे पहले लिया जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार एक बार एक महिला श्रृंगी ऋषि के पास पहुंचकर उनसे कहा कि मेरे पति दुर्व्यसनों से घिरे हुये हैं और इस कारण कोई धार्मिक कार्य , व्रत या अनुष्ठान नहीं कर पा रही हूं। ऐसे में क्या करूं कि मां शक्ति ‘की कृपा मुझे प्राप्त हो और मुझे मेरे कष्टों से मुक्ति मिले। तब ऋषि ने महिला के कष्टों से मुक्ति पाने के लिये गुप्त नवरात्र में साधना करने के लिये कहा था। इस नवरात्रि में माता के मंदिरों में यज्ञ , हवन सहित विभिन्न अनु्ठान संपादित होंगे। गुप्त नवारत्रि में सिद्धिकुंजिका स्तोत्र का पाठ करना बहुत लाभदायक होता है। इस दौरान देवी माँ के भक्त बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हं। वे लम्बी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं। गुप्त नवरात्र में माता की शक्ति पूजा एवं अराधना अधिक कठिन होती है इस पूजन में अखंड ज्योत प्रज्वलित की जाती है। नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशति का पाठ किया जाता है। यथासंभव नवरात्रि के नौ दिनों में प्रत्येक श्रद्धालु को दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिये किन्तु किसी कारणवश यह संभव नहीं हो तो देवी के नवार्ण मंत्र का जप यथाशक्ति अवश्य करना चाहिये। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन पूर्णाहुति हवन एवं कन्याभोज कराकर किया जाना चाहिये। पूर्णाहुति हवन दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से किये जाने का विधान है किन्तु यदि यह संभव ना हो तो देवी के नवार्ण मंत्र , सिद्ध कुंजिका स्तोत्र अथवा दुर्गा अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र से हवन संपन्न करना श्रेयस्कर रहता है।


प्रतिदिन लगने वाला भोग

प्रतिपदा को रोगमुक्त रहने के लिये प्रतिपदा तिथि के दिन मां को गाय के घी से बनी सफेद चीजों का भोग लगायं। द्वितीया तिथि को लम्बी उम्र के लिये मिश्री , चीनी और पंचामृत का भोग लगायें। तृतीया तिथि को दुख से मुक्ति के लिये दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगायें। चतुर्थी तिथि को तेज बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिये मालपुये का भोग लगायें। पंचमी तिथि को स्वस्थ शरीर के लिये केले का भोग लगायें। षष्ठी तिथि को आकर्षक व्यक्तित्व और सुंदरता पाने के लिये शहद का भोग लगायें। सप्तमी तिथि को संकटों से बचने के लिये गुड़ का नैवद्य अर्पित करें। अष्ट्मी तिथि को संतान संबंधी समस्या से छुटकारा पाने के लिये नारियल का भोग लगायें। नवमी तिथि को सुख-समृद्धि के लिये मां को हलवा, चना- पूरी, खीर आदि का भोग लगायें।

The News Related To The News Engaged In The https://apnachhattisgarh.com Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.



