मुंगेली में धान खरीदी का महाघोटाला उजागर, 8.14 करोड़ की हेराफेरी से मचा हड़कंप

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राइस मिलर, समिति प्रबंधक व ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा 5 आरोपी गिरफ्तार, 4 फरार — शासन को करोड़ों का नुकसान

रायपुर/मुंगेली । मुंगेली जिले में धान खरीदी और परिवहन व्यवस्था में बड़े पैमाने पर हुए फर्जीवाड़े का खुलासा होने से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन द्वारा की गई सघन जांच में 8 करोड़ 14 लाख रुपए से अधिक के आर्थिक नुकसान का मामला सामने आया है। यह घोटाला फर्जी वाहनों, अत्यधिक ओवरलोडिंग, बिना जीपीएस परिवहन और धान की रिसायक्लिंग के जरिए अंजाम दिया गया। मामले में अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 4 आरोपी फरार हैं।

कैसे हुआ घोटाले का खुलासा

आईसीसीसी मार्कफेड रायपुर से मिले अलर्ट के बाद मुंगेली जिला प्रशासन हरकत में आया। अलर्ट में धान उठाव और परिवहन के आंकड़ों में भारी अंतर पाए जाने की जानकारी थी। इसके बाद कलेक्टर कुंदन कुमार और पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के निर्देश पर खाद्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम गठित कर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान पाया गया कि धान परिवहन में लगे कई वाहनों की क्षमता से कई गुना अधिक वजन दर्शाया गया। कुछ मामलों में वाहनों द्वारा 200 प्रतिशत से लेकर 1116 प्रतिशत तक अधिक धान उठाव दिखाया गया, जो तकनीकी और व्यावहारिक रूप से असंभव है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि कागजों में फर्जीवाड़ा कर वास्तविक धान को बार-बार दर्शाया गया।

फर्जी वाहन और जीपीएस सिस्टम का दुरुपयोग

जांच में यह भी सामने आया कि कई वाहनों के नंबर फर्जी थे या ऐसे वाहन दिखाए गए जो वास्तव में मौजूद ही नहीं थे। अनेक मामलों में बिना जीपीएस लगे वाहनों से धान परिवहन दिखाया गया, जबकि नियमों के अनुसार जीपीएस अनिवार्य है। कुछ वाहनों में जीपीएस लगा होने के बावजूद उसका दुरुपयोग कर गलत लोकेशन और समय दर्ज किया गया।

राइस मिलरों और समितियों की मिलीभगत

प्रशासनिक जांच में स्पष्ट हुआ कि यह फर्जीवाड़ा अकेले किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि राइस मिलर संचालकों, समिति प्रबंधकों और ट्रांसपोर्टरों की संगठित साजिश थी।

  • नवागांव घुठेरा समिति ने उपलेटा राइस मिल से मिलीभगत कर 74 जीपीएस युक्त और 40 से अधिक बिना जीपीएस वाहनों के जरिए अवैध धान परिवहन कराया।
  • सिंघनुपरी उपार्जन केंद्र ने एसएस फूड के साथ मिलकर 4,542 क्विंटल धान का फर्जी परिवहन दर्शाया।
  • छटन उपार्जन केंद्र में दीपक राइस मिल और नवकार मिल के साथ मिलकर 3,589 क्विंटल धान का अवैध उठाव दिखाया गया।
  • झगरहट्टा उपार्जन केंद्र में वर्धमान राइस मिलर्स के साथ अनियमितता पाई गई।

प्रारंभिक जांच में करीब 11 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी और परिवहन में अनियमितता के संकेत मिले हैं, जिसकी विस्तृत जांच अभी जारी है।

गिरफ्तार आरोपी और फरार की तलाश

इस प्रकरण में अब्दुल सत्तार (दाउपारा निवासी), विकास पाण्डेय (भटगांव-मुंगेली), महावीर जैन, संतोष साहू और श्रीधर परिहार को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है।
वहीं अब्दुल समद, ललित जैन, नवेन्द मेनन और अनिल जांगड़े फरार हैं। पुलिस ने फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित की हैं और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

अन्य थानों में भी दर्ज हुए अपराध

धान खरीदी में फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों में थाना फास्टरपुर और थाना लालपुर में भी अलग-अलग अपराध दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में भी कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।

प्रशासन का सख्त संदेश

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी, परिवहन और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किसी भी तरह की गड़बड़ी, भ्रष्टाचार या फर्जीवाड़ा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी और यदि इसमें और लोग संलिप्त पाए गए तो उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई राज्य में पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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