गिरौदपुरी धाम में दो दिवसीय पंथी नृत्य एवं दर्शन यात्रा समारोह संपन्न 1100 से अधिक पंथी कलाकारों ने एक साथ किया नृत्य, अध्यात्म और सामाजिक समरसता का दिया संदेश


गिरौदपुरी धाम। दिनांक 24 एवं 25 जनवरी को पंथी नृत्य अकादमी संगठन छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में दो दिवसीय गिरौदपुरी धाम दर्शन यात्रा समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में छत्तीसगढ़ की लगभग 40 ख्याति प्राप्त पंथी पार्टियों के करीब 1100 पंथी कलाकारों ने सहभागिता की। कार्यक्रम ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, अध्यात्म और सामाजिक समरसता को नई ऊंचाई प्रदान की।
दिनांक 24 जनवरी को सभी पंथी कलाकार मड़वा धर्मशाला, गिरौदपुरी धाम में एकत्रित हुए। इसके पश्चात 25 जनवरी को प्रातः 10 बजे गिरौदपुरी धाम के मुख्य द्वार से सभी कलाकार पारंपरिक पंथी वेशभूषा में एक साथ पंथी नृत्य करते हुए निकले। मनमोहक नृत्य के साथ कलाकार सबसे ऊंचे जय स्तंभ तक पहुंचे, जहां अध्यात्म गुरु एवं धर्म गुरु सोमेश बाबा का भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. राधेश्याम बारले ने की, जबकि आयोजन लक्ष्मीकांत जड़ेजा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर तुषांत बारले द्वारा प्रस्तुत पंथी गीतों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। रोहित कोसरिया, दिनेश जांगड़े, गौकरण दास बघेल, अमोलदास टंडन, भूपेंद्र चाणक्य, भगवान दास टंडन, वीरेंद्र टंडन, राजेंद्र टंडन, पदुम्मान सरोज, पाहित शांता सोनवानी सहित अनेक कलाकारों के सहयोग से दो पंक्तियों में हर्षोल्लास के साथ पंथी नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी गई।

अध्यात्म गुरु सोमेश बाबा ने स्वयं पंथी कलाकारों को परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की अमृत वाणी, पंथी भजन एवं नृत्य के माध्यम से सतनाम संदेश दिया। इसके बाद मुख्य मंदिर में गुरु वाणी का पाठ एवं सतनाम संदेश का अमृत रसपान कराया गया। बाबा ने कहा कि खान-पान, रहन-सहन, बोलचाल एवं वेशभूषा सादा होनी चाहिए, यही गुरु घासीदास जी का मूल संदेश है।
इस अवसर पर लक्ष्मीकांत जड़ेजा, अध्यक्ष लोक सांस्कृतिक खेल एवं मानव कल्याण समिति, पंथी पार्टी भटगांव (जिला मुंगेली) को मानव-मानव एक समान एवं सामाजिक समरसता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। अध्यात्म गुरु सोमेश बाबा ने उनके कार्यों की सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य मंदिर परिसर में 2100 दीप प्रज्वलित कर महाआरती का आयोजन किया गया। पूरे भारतवर्ष में शांति, भाईचारा और सामाजिक समरसता बनी रहे तथा विश्व कल्याण हो—इस हेतु परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी से विशेष प्रार्थना की गई। दो दिवसीय यह आयोजन अत्यंत भव्य, अनुशासित एवं भावनात्मक रूप से सफल रहा, जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं एवं कलाकारों ने लंबे समय तक स्मरणीय बताया।

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