कथावाचिका एवं भजन गायिका साध्वी प्रेम बाईसा को दी गई समाधि

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• अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

बालोतरा । जोधपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद राजस्थान की प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा (25 वर्षीया) को उनके पैतृक गांव परेऊ (जिला बालोतरा) में उनके द्वारा ही स्थापित शिव शक्ति धाम आश्रम में पूरे विधि-विधान के साथ समाधि दी गई। साध्वी के निधन के बाद से ही गांव परेऊ में शोक और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है , वे 12 वर्ष की उम्र से ही धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर चल रही थी। उनके अंतिम दर्शन के लिये दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु , संत-महात्मा और ग्रामीण भी पहुंचे हुये थे। बताते चलें कि साध्वी प्रेम बाईसा मंगलवार (27 जनवरी) को अजमेर से कथा समाप्त करके जोधपुर के आरती नगर आश्रम लौट रही थीं।

अगले ही दिन उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई तो उनकी हालत को देखते हुये एक कंपाउंडर ने उन्हें इंजेक्शन लगाया। लेकिन तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें पाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया , जहाँ उनका निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर बुधवार (28 जनवरी) को जोधपुर से उनके पैतृक गांव परेऊ लाया गया , फिर गुरुवार (29 जनवरी) को पोस्टमार्टम के दौरान कुछ विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हुई। लेकिन प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में इसे नियंत्रित कर लिया गया। उनके पार्थिव शरीर के आश्रम पहुंचने के बाद से ही रात भर भजन कीर्तन का दौर चलता रहा और आज परेऊ गांव में पूरे विधि-विधान के साथ उनको समाधि दी गई। उल्लेखनीय है कि मूलतः परेऊ निवासी प्रेम बाईसा ने मात्र दो वर्ष की आयु में अपनी मां को खो दिया था। पिता विरमनाथ उन्हें जोधपुर के गुरुकृपा आश्रम ले गये , जहां संत राजाराम जी महाराज और संत कृपाराम जी महाराज के सान्निध्य में उन्होंने शिक्षा ली। अपने मधुर भजनों और भागवत कथा के कारण वे कम समय में ही देश-विदेश में लोकप्रिय हो गईं। साध्वी के निधन से परेऊ गांव और उनके अनुयायियों में गहरा शोक है। अब सबकी नजरें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं , ताकि मौत के असली कारणों का खुलासा हो सके।

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