रामायण वार्ता’ प्रकल्प के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने चिंतामणि महाराज

0
IMG-20260211-WA1012.jpg

रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

• संस्था रामायण रिसर्च काउंसिल का प्रकल्प है रामायण वार्ता

• इसके अंतर्गत संस्कृत के शिक्षण-प्रशिक्षण का होता है कार्य

• सरगुजा से सांसद चिंतामणि महाराज के नेतृत्व में देवभाषा के प्रसार के लिए अभियान चलाएगी काउंसिल

नई दिल्ली,सरगुजा । रामायण सर्व काउंसिल जाने प्रकल्प रामायण वार्ता के अंतर्गत देश भर में संस्कृत भाषा के उत्थान को लेकर कार्य करती रही है। अब रामायण वार्ता की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ में सरगुजा से सांसद चिंतामणि महाराज को मिली है। इस प्रकल्प के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मनोनयन के बाद चिंतामणि महाराज ने कहा कि उनके लिए गौरव का विषय है कि रामायण रिसर्च काउंसिल जैसी संस्था जो वर्षों से संस्कृत भाषा के उत्थान को लेकर शिक्षण एवं प्रशिक्षण की दिशा में कार्य करती रही है, इसके लिए अब साथ चलने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि वह छत्तीसगढ़ में संस्कृत बोर्ड के चेयरमैन भी रहे हैं और संस्कृत महाविद्यालय का संचालन भी करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता भी संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं और वह उन्हीं के सपनो को साकार करने की दिशा में कार्य करते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वह रामायण वार्ता के अंतर्गत संस्कृत भाषा के शिक्षण-प्रशिक्षण के प्रति सनातन परिवार को जागरूक करेंगे और इसके लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएंगे। उन्होंने बताया कि काउंसिल के तत्वावधान में संस्कृत भाषा को लेकर 10 दिनों का एक कोर्स तैयार किया गया है, जिस पर 60 वीडियोज भी प्रोड्यूस किया जाएंगे। उन्होंने कहा कि वीडियोज और बुक के माध्यम से देश के विभिन्न संस्थानों में शिविर लगाए जाएं‌गे और देव भाषा की महत्ता और उसे बचाने की आवश्यकता पर जानकारी प्रदान की जाए।सांसद महाराज ने कहा कि यह संस्था प्रति वर्ष संस्कृत भाषा के प्रोत्साहन को लेकर कार्य करने वाले महानुभाव संस्कृत भूषण सम्मान भी देती है और पिछले तीन वर्षों से संस्कृत भाषा में पाक्षिक पत्रिका का प्रकाशन करती रही है।
उन्होंने कहा कि पटना आईआईटी की नोडल संस्था है जो तकनीक के माध्यम से देवाभाषा को हर सनातन परिवार तक पहुंचाने के लिए सतत प्रयत्न कर रही है।उन्होंने कहा कि देश के अन्य आईआईटी को इस कार्य में तकनीकी सहयोगी के रूप में जोड़कर हर हाथ में मोबाइल के माध्यम से संस्कृत भाषा के प्रशिक्षण कार्यक्रम को पहुंचाने का प्रयत्न करेंगे।उन्होंने संस्कृत के विद्वानों से इस अभियान में जुड़ने और श्रमदान की अपील भी की।सरगुजा सांसद ने देवभाषा और सनातन संस्कृति के प्रचार के लिए केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार
समेत कई राज्यों की सनातनी सरकारी की प्रशंसा भी की।

बोले सांसद,निभाऊंगा जिम्मेदारी को,करूंगा काम,दिलाऊंगा एक नई पहचान

नियुक्त होने के बाद सांसद के कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है।उसे पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाएंगे।इसके लिए प्रदेश भर में घूम घूम कर संस्कृत का अलख जगाएंगे।इसके साथ ही देश के अन्य राज्यों में भी जाकर संस्कृत की भाषा को लेकर प्रचार प्रसार किया जायेगा।ताकि लोग संस्कृत के प्रति जागरूक हो सके और संस्कृत के बारे में समझ सके,बोल सके और इसकी महत्व को समझे

रामायण वार्ता’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का दायित्व सांसद चिन्तामणि महाराज को

संस्था ‘रामायण रिसर्च काउंसिल’ द्वारा संचालित ‘रामायण वार्ता’ प्रकल्प के अंतर्गत संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार तथा शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए देशभर में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में संस्था द्वारा हाल ही में ‘रामायण वार्ता’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का दायित्व सांसद चिन्तामणि महाराज को सौंपा गया है।

आखिर कौन है सांसद चिंतामणि महराज

सरगुजा (छत्तीसगढ़) लोकसभा क्षेत्र के वर्तमान सांसद चिंतामणि महाराज हैं। वे भारतीय जनता पार्टी से संबद्ध हैं और उन्होंने 2024 के भारतीय आम चुनाव में सरगुजा (एसटी) निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस की शशि सिंह को हराकर यह सीट जीती है।चूंकि वे सरल और सहज इंसान है जिसके कारण जनता के बीच वे काफी लोकप्रिय भी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

error: Content is protected !!