एक मोटर बदली, कई चेहरों पर लौटी मुस्कान: भाटपारा में फिर बहा उम्मीदों का जल
रायपुर । जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे सूरजपुर जिले के दूरस्थ भाटपारा गांव में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति पंडो समुदाय के परिवारों के लिए पानी सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जब गांव में स्थापित सोलर पावर पंप की मोटर अचानक खराब हो गई, तो लोगों की चिंता बढ़ गई। गर्मी के दिनों में पेयजल की व्यवस्था प्रभावित होने से ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
लेकिन इस बार उनकी परेशानी लंबी नहीं चली। जैसे ही प्रशासन और संबंधित विभाग को समस्या की जानकारी मिली, तत्काल कार्रवाई शुरू की गई। खराब मोटर को निकालकर नया मोटर पंप स्थापित किया गया और कुछ ही समय में गांव में फिर से पानी की धार बहने लगी।
जब नल से पानी निकलना शुरू हुआ तो ग्रामीणों के चेहरों पर राहत साफ दिखाई दी। महिलाओं को दूर-दूर तक पानी की चिंता नहीं रही और बुजुर्गों ने भी संतोष की सांस ली। ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन की तत्परता ने उन्हें यह भरोसा दिलाया है कि दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याएं भी अब प्राथमिकता से सुनी और सुलझाई जा रही हैं।
इस दौरान लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया कि किसी प्रकार की असुविधा न हो। गांव के पास स्थित हैंडपंप से लगातार पानी की उपलब्धता बनी रही, जिससे लोगों को पेयजल के लिए भटकना नहीं पड़ा।
भाटपारा की यह छोटी-सी घटना एक बड़े संदेश को सामने लाती है—विकास केवल योजनाएं बनाने से नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई से लोगों के जीवन में बदलाव लाने से होता है। दूरस्थ वनांचल में रहने वाले परिवारों तक मूलभूत सुविधाएं समय पर पहुंचाना ही सुशासन की वास्तविक पहचान है।

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