गीता श्लोक से मिलती है मन को आध्यात्मिक शांति – पीएम मोदी


अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
उड्डपी (कर्नाटक) – हमारे समाज में मंत्रों का और गीता के श्लोकों का पाठ तो शताब्दियों से हो रहा है , पर जब एक लाख कंठ एक स्वर में इन श्लोकों का उच्चारण करते हैं , जब इतने सारे लोग गीता जैसे पुण्य ग्रन्थ का पाठ करते हैं। जब ऐसे दैवीय शब्द एक स्थान पर एक साथ गूंजते हैं तो एक ऐसी ऊर्जा निकलती है , जो हमारे मन और मष्तिष्क को एक नया स्पंदन और नई शक्ति देती है।
उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री कृष्ण मठ में लक्ष कंठ गीता पारायण कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कही। उन्होंने कहा उडुपी आना मेरे लिये बहुत खास है। अयोध्या से उडुपी तक रामजन्मभूमि आंदोलन में संतों की भूमिका रही है , उडुपी के लिये राम मंदिर का निर्माण एक और कारण से विशेष है। नये मंदिर में वेदांत के प्रकाश स्तंभ जगद्गुरु माधवाचार्य को भी जगह दी गई है। उडुपी जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के अच्छे शासन के मॉडल की कर्मभूमि रही है। वर्ष 1968 में उडुपी के लोगों ने जनसंघ के वीएस आचार्य को उडुपी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के लिये चुना था। इसके साथ ही , उडुपी ने एक नये शासन मॉडल की नींव रखी। उन्होंने दुश्मनों को सुदर्शन चक्र की धमकी देते हुये कहा कि ये नया भारत है , जो किसी के सामने झुकता नही है। लाल किले से हम भगवान कृष्ण की करुणा का संदेश देते हैं और उसी पुरानी प्रेरणा से हम मिशन सुदर्शन चक्र की भी घोषणा करते हैं। मिशन सुदर्शन चक्र का मतलब है देश की खास जगहों , इसके इंडस्ट्रियल और पब्लिक सेक्टर के चारों ओर एक ऐसा सुरक्षा कवच बनाना , जिसे दुश्मन तोड़ ना सकें। अगर कोई दुश्मन हमला करने की हिम्मत करता है , तो हमारा सुदर्शन चक्र उसे खत्म कर देगा। पीएम मोदी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण हमें नारी सुरक्षा, नारी सशक्तिकरण का ज्ञान सिखाते हैं। और उसी ज्ञान की प्रेरणा से देश नारीशक्ति वंदन अधिनियम का ऐतिहासिक निर्णय करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि रामचरित मानस में लिखा है- कलियुग केवल हरि गुन गाहा, गावत नर पावहिं भव थाहा। अर्थात कलियुग में केवल भगवद् नाम और लीला का कीर्तन ही परम साधन है। उसके गायन कीर्तन से भवसागर से मुक्ति हो जाती है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पीएम का पद सम्हालने के बाद श्री कृष्ण मठ के पहले दौरे पर उड्डपी पहुंचे थे। यहां एयरपोर्ट से तीन किलोमीटर लम्बा रोड शो के बाद उन्होंने श्री कृष्ण मठ में दर्शन करने के साथ ही 13वीं सदी के आध्यात्मिक गुरु श्री माधवाचार्य को भी याद किया। यहां स्वामी सुगुनेंद्र तीर्थ ने विश्व गीता पर्याय लक्ष्य कंठ गीता परायण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन किया। इस दौरान पीएम ने कृष्ण मंदिर के सामने बने सुवर्ण तीर्थ मंडप का भी उद्घाटन किया और पवित्र कनकना किंदी के लिये कनक कवच समर्पित किया। यह एक लाख लोगों का एक भक्ति कार्यक्रम था जिसमें स्टूडेंट्स , साधु , विद्वान और अलग-अलग तरह के लोग शामिल हुये। इस दौरान तमाम सांस्कृतिक दलों ने प्रस्तुतियां भी दीं , जिसमें कर्नाटक की जीवंत परंपरा नजर आई। बताते चलें कि यह पीएम मोदी का तीसरा उडुपी दौरा है। वर्ष 1993 में वे पहली बार उडुपी आये थे , उसके बाद दोबारा उन्हें वर्ष 2008 में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर उडुपी आने का मौका मिला था।

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