मनरेगा से बदली लोमेश साहू की जिंदगी, पक्का पशु शेड बना तरक्की का सहारा


रिपोर्टर ✒️ कमलेश सिंह
कवर्धा। कहते हैं कि मजबूत इरादों और सही सरकारी योजना का साथ मिल जाए तो जीवन की राह आसान हो जाती है। कवर्धा जिले के ग्राम पंचायत चरडोंगरी के रहने वाले गौ-पालक लोमेश साहू की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। मनरेगा योजना ने उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाया और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद की।
लोमेश साहू का परिवार खेती और पशुपालन पर निर्भर था। उनके पास गाय-भैंस तो थीं, लेकिन उन्हें रखने के लिए पक्का शेड नहीं था। कच्चे शेड में बरसात के समय कीचड़ और गंदगी हो जाती थी। गोबर और गौमूत्र के कारण सफाई रखना मुश्किल हो जाता था, जिससे पशु बीमार पड़ते थे और दूध उत्पादन भी कम हो जाता था। आर्थिक तंगी के कारण पक्का शेड बनवाना उनके लिए बहुत कठिन था।
इसी बीच मनरेगा योजना के तहत उन्हें 53 हजार रुपये की लागत से पक्का पशु शेड बनाने की स्वीकृति मिली। निर्माण के दौरान उन्हें 36 मानव-दिवस का रोजगार भी मिला और मजदूरी की राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा हुई। ग्राम पंचायत के सहयोग से मजबूत और साफ-सुथरा पशु शेड बनकर तैयार हो गया, जिससे उनकी सबसे बड़ी समस्या दूर हो गई।
पक्का शेड बनने के बाद उनके पशु सुरक्षित और स्वस्थ रहने लगे, जिससे दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई। आज उनके पास 12 गाय और 2 भैंस हैं और वे प्रतिदिन लगभग 50 से 60 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं। इससे उन्हें हर महीने करीब 40 से 45 हजार रुपये की शुद्ध आय होने लगी है। साथ ही, गोबर से जैविक खाद बनाकर वे अपनी खेती में उपयोग कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत भी कम हो गई है।
लोमेश साहू कहते हैं कि मनरेगा से मिला यह पशु शेड उनकी तरक्की की नींव साबित हुआ है। अब पशु सुरक्षित हैं, साफ-सफाई बनी रहती है और आय भी बढ़ गई है। इस योजना ने उनके परिवार को आत्मनिर्भर बना दिया है। आज वे न केवल अपने परिवार का बेहतर तरीके से पालन-पोषण कर रहे हैं, बल्कि गांव के अन्य किसानों के लिए भी एक प्रेरणा बन गए हैं।

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