मनरेगा कर्मियों का भविष्य अधर में 20 साल की सेवा के बाद भी न नियमितीकरण, न सुरक्षा, फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान


रायपुर । छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को ज़मीनी स्तर पर सफल बनाने वाले हजारों कर्मियों का भविष्य एक बार फिर अधर में लटक गया है। वर्षों से लंबित मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं होने से नाराज छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ ने फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है।
वर्षों से लंबित मांगों पर नहीं हुई सुनवाई
महासंघ के पदाधिकारियों के अनुसार मनरेगा कर्मी बीते 20 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे हैं, इसके बावजूद न तो उन्हें सेवा सुरक्षा मिली और न ही सामाजिक सुरक्षा। नियमितीकरण, ग्राम रोजगार सहायकों का ग्रेड पे निर्धारण और 18 माह से लंबित मानव संसाधन (HR) नीति को लागू करने की मांग को लेकर उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री तथा प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार मुलाकात की गई। सैकड़ों ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।

बनी थी कमेटी, दो साल बाद भी रिपोर्ट नहीं

सरकार गठन के बाद मनरेगा कर्मियों की मांगों पर विचार के लिए एक समिति गठित की गई थी, जिसे 15 दिनों में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी न रिपोर्ट आई और न ही मांगों पर निर्णय लिया गया। इससे कर्मियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।

प्रांतीय बैठक में बनी आंदोलन की रणनीति
इन्हीं मुद्दों को लेकर रविवार को रायपुर स्थित शादाणी दरबार में महासंघ की प्रांतीय स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
केंद्र से मिला था आश्वासन, राज्य में नहीं हुई पहल
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह क्षत्री ने बताया कि हाल ही में देशभर के मनरेगा कर्मचारी संगठनों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान केंद्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य शासन से चर्चा कर कर्मियों की सेवा सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया था। यह जानकारी उपमुख्यमंत्री को भी दी गई थी।
एक माह में HR पॉलिसी लागू करने का वादा भी अधूरा
उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री ने 18 माह से लंबित मामलों पर आयुक्त मनरेगा को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए थे। वहीं आयुक्त मनरेगा द्वारा 3 जनवरी 2026 को एक माह के भीतर HR पॉलिसी लागू करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई परिणाम सामने नहीं आया।
‘गारंटी फॉर रोजगार’ मिशन भी रोका जाएगा
महासंघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ को भी जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया जाएगा।
15 दिन का अल्टीमेटम
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिवस के भीतर ग्राम रोजगार सहायकों का वेतनमान निर्धारण, नियमितीकरण की प्रक्रिया और सेवा व सामाजिक सुरक्षा को शामिल करते हुए HR नीति लागू नहीं की गई, तो इसी माह से प्रदेशभर के मनरेगा कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर उतरेंगे।

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