मस्तूरी के पचपेड़ी पीएचसी की बदहाली उजागर — समय से पहले गायब हो रहा स्टाफ, मरीज बेहाल
रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
बिलासपुर/मस्तूरी। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गिरती स्थिति एक बार फिर सामने आई है। निजी अस्पतालों के विस्तार के बीच सरकारी स्वास्थ्य ढांचा लगातार कमजोर होता जा रहा है। ताजा मामला मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पचपेड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) का है, जहां मूलभूत सुविधाओं के अभाव और कर्मचारियों की लापरवाही ने स्वास्थ्य सेवाओं को लगभग ठप कर दिया है।
स्थानीय स्तर पर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सोमवार को भाजपा प्रदेश महामंत्री चंद्र प्रकाश सूर्या जनप्रतिनिधियों के साथ औचक निरीक्षण के लिए पीएचसी पचपेड़ी पहुंचे। निरीक्षण के दौरान जो स्थिति सामने आई, उसने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
तय समय से पहले खाली हो जाता है अस्पताल
स्वास्थ्य केंद्र में कुल 15 स्टाफ की तैनाती बताई जाती है, लेकिन निरीक्षण के दौरान दोपहर 3 बजे के बाद अधिकांश कर्मचारी अनुपस्थित मिले। जबकि उनकी निर्धारित ड्यूटी सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक है।
मौके पर मौजूद मरीजों ने बताया कि यह कोई एक दिन की समस्या नहीं, बल्कि लंबे समय से यही स्थिति बनी हुई है। कर्मचारी नियमित रूप से उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर कर लेते हैं, लेकिन दोपहर होते ही अस्पताल छोड़ देते हैं।
मरीजों को लौटना पड़ता है निराश
निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में मरीज मौजूद थे, जिन्हें इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। कई मरीज बिना उपचार के ही वापस लौटने को मजबूर दिखे। ग्रामीणों ने बताया कि आपात स्थिति में भी चिकित्सक और स्टाफ का मिलना मुश्किल होता है, जिससे गंभीर जोखिम की स्थिति बन जाती है।
“यह रोज की बात है” — स्वास्थ्य कर्मी का बयान
निरीक्षण के दौरान मौजूद एक महिला स्वास्थ्य कर्मी ने स्वीकार किया कि स्टाफ का समय से पहले चले जाना “रोज की बात” है। यह बयान अपने आप में स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविकता को उजागर करता है।
पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी ठप
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 4-5 दिनों से स्वास्थ्य केंद्र में पानी की सप्लाई तक बाधित है। इसके बावजूद किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
अधिकारियों से जवाब-तलब, संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं
मामले को लेकर चंद्र प्रकाश सूर्या ने बीएमओ और सीएमएचओ डॉ. शुभा गढ़ेवाल से फोन पर चर्चा की। अधिकारियों ने ड्यूटी समय की पुष्टि तो की, लेकिन कर्मचारियों की अनुपस्थिति पर स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए।
वर्षों से जमे कर्मचारी, कार्रवाई का अभाव
स्थानीय लोगों के अनुसार, पचपेड़ी पीएचसी में कई कर्मचारी पिछले 15 वर्षों से पदस्थ हैं, जिनका अब तक स्थानांतरण नहीं हुआ। इससे उनमें प्रशासनिक भय समाप्त हो चुका है।
बताया जा रहा है कि
आरएमए शाइस्ता अजीज यहां लगभग 15 वर्षों से जमी हुई है।
आरएमए विजय टंडन भी निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित मिले।
इनके अलावा भी अधिकांश स्टाफ मौके पर मौजूद नहीं मिला, जिससे जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी देखी गई।
जनप्रतिनिधियों ने जताई कड़ी नाराजगी
निरीक्षण के दौरान पंचायत प्रतिनिधि राधा खिलावन पटेल, जनपद पंचायत सभापति प्रतिनिधि सरिता नरेंद्र नायक, विपुल मिश्रा, राहुल पांडे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्था और चिकित्सकों की लापरवाही पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि जब सरकार समय पर वेतन और सुविधाएं प्रदान कर रही है, तो कर्मचारियों से जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा भी स्वाभाविक है। इसके बावजूद यदि दूरस्थ क्षेत्रों में इस प्रकार की लापरवाही जारी है, तो यह प्रशासनिक विफलता का संकेत है।
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से पूरे मामले की शिकायत कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पचपेड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का मामला केवल एक संस्थान की बदहाली नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त व्यापक समस्याओं का प्रतीक है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा असर आम नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य पर पड़ेगा। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर क्या कार्रवाई करता है।
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