चिरायु योजना बनी वरदान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत राज्य के बाहर हैदराबाद में हुई जटिल ओपन हार्ट सर्जरी, बची बच्चे की जान
बिलासपुर । राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत संचालित चिरायु योजना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि समय पर पहचान और उचित उपचार से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को नया जीवन दिया जा सकता है। बिलासपुर जिले के विकासखंड तखतपुर के चिरायु दल ने संवेदनशीलता, तत्परता और समर्पण का परिचय देते हुए छह वर्षीय मासूम टोकेशवर निर्मलकर को नया जीवन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले इस बच्चे का उपचार राज्य के बाहर हैदराबाद में अत्यंत जटिल ओपन हार्ट सर्जरी के माध्यम से संभव हो सका।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना है, जिसका उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात बीमारियों, हृदय रोग, कुपोषण, विकास संबंधी समस्याओं एवं अन्य गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान कर निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत चिरायु दल स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कर बच्चों की स्क्रीनिंग करता है तथा जरूरतमंद बच्चों को उच्च स्तरीय उपचार एवं सर्जरी की सुविधा भी शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उसलापुर निवासी रामायण निर्मलकर के छह वर्षीय पुत्र टोकेशवर निर्मलकर को चिरायु दल द्वारा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं स्क्रीनिंग अभियान के दौरान चिन्हित किया गया। प्रारंभिक जांच में बच्चे के हृदय में गंभीर जन्मजात विकार पाए गए। चिकित्सकों के अनुसार बच्चे के हृदय में ऐसी जटिल बीमारी थी, जिसके कारण उसकी स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई थी और किसी भी समय जान का खतरा उत्पन्न हो सकता था। बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिरायु दल ने बिना विलंब किए उसे जिला अस्पताल बिलासपुर रेफर किया। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परीक्षण के बाद बच्चे को रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) भेजा गया। मेकाहारा में विस्तृत जांच के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे के हृदय की बीमारी अत्यंत जटिल है तथा उसका ऑपरेशन राज्य के बाहर किसी सुपर स्पेशियलिटी कार्डियक सेंटर में ही संभव है।
इसके बाद बच्चे को हैदराबाद स्थित केयर हॉस्पिटल में उपचार हेतु रेफर किया गया। अस्पताल के विशेषज्ञ हृदय रोग चिकित्सकों ने जांच के उपरांत बताया कि बच्चे के हृदय की स्थिति अत्यंत गंभीर है और उसे बचाने के लिए जटिल ओपन हार्ट सर्जरी करना आवश्यक होगा। डॉक्टरों के अनुसार यह सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण और चुनौतीपूर्ण थी, जिसके लिए विशेष कार्डियक सर्जन टीम एवं अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता थी। उपचार एवं सर्जरी में लगभग सात लाख रुपए का खर्च बताया गया, जिसे वहन कर पाना गरीब परिवार के लिए संभव नहीं था। मामले की गंभीरता को समझते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शुभा गरेवाल के निर्देशन मे उपचार हेतु आवश्यक दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट एवं समस्त प्रशासनिक प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कराया गया। लगातार समन्वय और प्रयासों के बाद राज्य नोडल एजेंसी द्वारा बच्चे के उपचार के लिए सात लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई तथा राशि सीधे हैदराबाद के केयर हॉस्पिटल को हस्तांतरित की गई।
आर्थिक सहायता स्वीकृत होने के बाद बच्चे को तत्काल हैदराबाद भेजा गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 8 मई 2026 को बच्चे के हृदय की अत्यंत जटिल और जोखिमपूर्ण ओपन हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की। ऑपरेशन कई घंटों तक चला और चिकित्सकों के अनुसार यह सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण थी। सफल सर्जरी के बाद बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और उपचार के पश्चात 29 मई 2026 को बच्चे को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। वर्तमान में बच्चा स्वस्थ है और सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा है। उपचार के बाद भी चिरायु दल द्वारा बच्चे की नियमित निगरानी की जा रही है। टीम समय-समय पर बच्चे के घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण एवं फॉलोअप कर रही है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। इस पूरी उपचार प्रक्रिया एवं बच्चे को नया जीवन दिलाने में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शुभा गरेवाल, विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. उमेश साहू, जिला नोडल अधिकारी डॉ. सौरभ शर्मा, तखतपुर विकासखंड प्रबंधक केशर सिंह, चिरायु चिकित्सक डॉ. शरद कुर्रे, डॉ. निशा बोरकर, आनंद सोनी एवं रंभा देवी का विशेष योगदान रहा।
बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इस सराहनीय कार्य पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए चिरायु दल एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है और इस प्रकरण में अधिकारियों एवं चिकित्सकों ने संवेदनशीलता और समर्पण के साथ कार्य करते हुए एक मासूम बच्चे का जीवन बचाने का उल्लेखनीय कार्य किया है। बच्चे के परिजनों ने भावुक होकर स्वास्थ्य विभाग, चिरायु योजना एवं शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि समय पर चिरायु दल बच्चे की बीमारी को चिन्हित नहीं करता और शासन से आर्थिक सहायता नहीं मिलती, तो उनके बेटे का जीवन बचा पाना संभव नहीं था।

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