उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने “द स्टोरी ऑफ किंग भोरमदेव – राजा भोरमदेव की कहानी” पुस्तक का किया विमोचन


रिपोर्टर ✒️ कमलेश सिंह
राजा भोरमदेव की गाथा पर आधारित पुस्तक से भोरमदेव को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान
कवर्धा। उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने विधायक कार्यालय कवर्धा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान “द स्टोरी ऑफ किंग भोरमदेव – राजा भोरमदेव की कहानी” पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक के रचनाकार रामप्रसाद बघेल को उपमुख्यमंत्री ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की शुभकामनाएं दीं।


इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक जिलेवासियों के लिए गर्व का विषय है। इससे न केवल भोरमदेव की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी, बल्कि राजा भोरमदेव की ख्याति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि यह कथा वैश्विक स्तर की है और इसके प्रकाशन से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान मिलेगी।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुस्तक राजा भोरमदेव के जीवन, उनके कालखंड और उनकी महिमा को उजागर करने के साथ-साथ मनुष्य, प्रकृति और चेतना के बीच संतुलन की गूढ़ दार्शनिक अवधारणा को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इस पुस्तक को पढ़ें और इसके संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करें।
पुस्तक के लेखक रामप्रसाद बघेल ने बताया कि “राजा भोरमदेव की कहानी” एक प्राचीन और रहस्यमयी युग से प्रारंभ होती है, जब आकाश से गिरे एक विशाल धूमकेतु ने प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ दिया। इसके साथ ही अंधकार से ऊर्जा प्राप्त करने वाले ड्रैगन जैसे घातक प्राणियों का उदय होता है, जो धीरे-धीरे पूरी पृथ्वी को भयावह अंधकार की ओर ले जाने लगते हैं। कथा का प्रमुख पात्र कुरुगुरु भद्रदेव बैगा है, जो विज्ञान, अध्यात्म और प्रकृति के संतुलन को समझने वाला नायक है।
कहानी में विद्वानों द्वारा यह खोज की जाती है कि ड्रैगनों के माथे पर चमकता नीला चिन्ह कोई साधारण आभूषण नहीं, बल्कि अंधकार से ऊर्जा खींचने वाला यंत्र है। जैसे-जैसे अंधकार बढ़ता है, ये प्राणी और अधिक शक्तिशाली होते जाते हैं। कथा में एक प्राचीन राजवंश के शासक राजा परसमनिधर देव और रानी नागमती की तपस्या, दिव्य और वैज्ञानिक शक्तियों का भी विस्तार से वर्णन है। राजा के पास पारस रत्न है, जो सूर्य ऊर्जा से पदार्थ और जीवन को परिवर्तित कर सकता है, जबकि रानी नागमती के पास नागमणि यंत्र है, जो विष को निष्प्रभावी करने और विनाश की शक्ति रखता है।
लेखक ने बताया कि यह कहानी केवल युद्ध और संघर्ष की नहीं, बल्कि प्रेम, नियति और चेतना की भी है। राजा और रानी का प्रेम झील के तट पर बिना शब्दों के, केवल अनुभूतियों और दृष्टियों से जन्म लेता है, जो विज्ञान, प्रकृति और चेतना के मिलन का प्रतीक बनता है।
इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विदेशीराम धुर्वे, संतोष पटेल, जनपद उपाध्यक्ष कवर्धा गणेश तिवारी, बोड़ला नंद श्रीवास, नरेंद्र मानिकपुरी, मनीराम साहू, अमर कुर्रे, प्रवीण शर्मा, जसबीर सालुजा, शैलेन्द्र उपाध्याय सहित जनप्रतिनिधि एवं क्षेत्र के नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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