बिहान योजना से बदली किस्मत, आत्मनिर्भर बनी ग्राम झलमला की जानकी धुर्वे

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रिपोर्टर ✒️ कमलेश सिंह

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सब्जी उत्पादन से सालाना दो लाख तक की आय, बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए मिसाल

कवर्धा।
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की मजबूत राह बनकर उभरी है। इस योजना से जुड़कर महिलाएं अपने हुनर और मेहनत के बल पर न केवल आजीविका के नए साधन अपना रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त भी हो रही हैं। ग्राम झलमला की जानकी धुर्वे इसकी जीवंत मिसाल हैं, जिन्होंने स्वयं सहायता समूह और बिहान योजना के सहयोग से सब्जी उत्पादन को अपनाकर अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी।

जानकी धुर्वे वर्ष 2013 से बिहान योजना से जुड़ी हुई हैं और “मां शीतला स्वयं सहायता समूह” की सक्रिय सदस्य हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत की आदत विकसित की और जरूरत पड़ने पर ऋण की सुविधा भी मिली। रोजगार शुरू करने के लिए उन्होंने समूह से एक लाख रुपये का ऋण लिया और सब्जी उत्पादन का कार्य प्रारंभ किया।

जानकी धुर्वे ने बैंगन, पत्ता गोभी और आलू की खेती की। मेहनत, नियमित देखभाल और सही तकनीक के चलते फसल अच्छी हुई। वे अपनी उपज आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूलों के मध्यान्ह भोजन, स्थानीय बाजार और मंडी में बेचती हैं। बाजार की सुविधा होने से उन्हें अपनी सब्जियों का उचित मूल्य मिल रहा है।

आज जानकी धुर्वे सालाना करीब 1.5 से 2 लाख रुपये की आमदनी कर रही हैं। इस आय से वे समय पर ऋण चुका रही हैं और अपने परिवार की जरूरतों को भी बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं। आर्थिक मजबूती के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

आगे की योजना के तहत जानकी धुर्वे एकीकृत फार्मिंग क्लस्टर के माध्यम से सब्जी उत्पादन को और विस्तार देने की तैयारी कर रही हैं। वे आने वाले समय में टमाटर और प्याज की खेती शुरू करेंगी, जिससे उनकी आय में और वृद्धि होगी।

बिहान योजना और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गांव की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। जानकी धुर्वे आज न केवल अपने परिवार का मजबूत सहारा बनी हैं, बल्कि ग्राम झलमला सहित आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बन चुकी हैं।

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