अमरकंटक उद्गम में मैया नर्मदा की भव्य नई मूर्ति होगी विराजित

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11 फरवरी को वैदिक विधि-विधान से होगा प्राण प्रतिष्ठा समारोह

श्री कल्याण सेवा आश्रम के सौजन्य से होगी प्रतिमा विराजित ।

संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक जो
मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी एवं करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक माना जाता है । श्री नर्मदा मंदिर में एक ऐतिहासिक एवं पुण्यकारी धार्मिक आयोजन होने जा रहा है । यहां पर वर्षों से विराजित नर्मदा उद्गम कुंड में पुरानी प्रतिमा के स्थान पर मां नर्मदा जी की नई और भव्य एवं दिव्य प्रतिमा को प्रतिष्ठित किया जाएगा ।
यह पुण्य कार्य श्री कल्याण सेवा आश्रम अमरकंटक के सौजन्य से संपन्न होने जा रहा है ।
श्री कल्याण सेवा आश्रम के प्रबंध न्यासी परम पूज्य श्री हिमाद्री मुनि जी महाराज द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार
दिनांक 11 फरवरी 2026 दिन बुधवार को प्रातः 11 बजे मां नर्मदा की ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित भव्य प्रतिमा को श्री नर्मदा मंदिर के उद्गम स्थल पर स्थित पुरानी प्रतिमा को बदल कर नयी प्रतिमा को विधिवत रूप से विराजित किया जाएगा ।

मां नर्मदा की इस नवीन प्रतिमा की स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा का पावन पूजन कार्य श्री नर्मदा मंदिर अमरकंटक के विद्वान पुजारीगण — पंडित कामता प्रसाद द्विवेदी , पंडित उमेश द्विवेदी , पंडित रूपेश द्विवेदी , पंडित उत्तम द्विवेदी सहित अन्य आचार्यगण द्वारा सम्पूर्ण वैदिक मंत्रोच्चार , शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न कराया जाएगा ।
परम तपस्वी एवं संत शिरोमणि बाबा कल्याण दास जी महाराज के पावन दिशा-निर्देश एवं मार्गदर्शन में
आज दिनांक 9 फरवरी 2026 को विधिवत उद्गम स्थल पहुंच एवं पूजन उपरांत संकल्प लिया गया । संकल्प उपरांत आगामी 11 फरवरी को प्रतिमा स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा समारोह अमरकंटक के प्रकांड विद्वानों द्वारा श्रद्धा , भक्ति और विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराया जाएगा ।
इस ऐतिहासिक अवसर पर श्री कल्याण सेवा आश्रम अमरकंटक से
पूज्य जगदीश आनंद जी महाराज , स्वामी हर स्वरूप जी महाराज ,
स्वामी धर्मानंद जी महाराज ,
स्वामी सुंदरानंद जी महाराज ,
विनोद कारकी जी एवं अन्य पुजारी , संत , भक्त
तथा स्थानीय पत्रकारों की गरिमामई उपस्थिति में संपन्न होगा ।
मां नर्मदा जी की नवीन भव्य प्रतिमा की स्थापना से अमरकंटक की धार्मिक , आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा और अधिक बढ़ेगी ।

इस पावन आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं एवं संत समाज में विशेष उत्साह एवं उल्लास का वातावरण व्याप्त है । आप सभी उपस्थित होकर पुण्य लाभ अर्जित करें ।

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