मछली पालन और सिंचाई का मजबूत आधार बनेगी आजीविका डबरी

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रिपोर्टर ✒️ कमलेश सिंह


मनरेगा की पहल से बैगा समुदाय के दिव्यांग हितग्राही को मिला आत्मनिर्भरता का संबल

कवर्धा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों के लिए स्थायी आजीविका के साधन भी विकसित कर रही है। जनपद पंचायत पंडरिया के ग्राम पंचायत लोखान अंतर्गत ग्राम कमराखोल में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के दिव्यांग हितग्राही अंधरू बैगा के लिए मनरेगा के तहत निर्मित की जा रही आजीविका डबरी इसका सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।

ग्राम सभा में मनरेगा के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यों की जानकारी दी गई, जिसमें आजीविका डबरी के लाभों पर विस्तार से चर्चा हुई। इससे प्रेरित होकर अंधरू बैगा ने डबरी निर्माण की मांग रखी। ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव पारित कर लगभग 1.05 लाख रुपये की लागत से डबरी स्वीकृत की गई। वर्तमान में निर्माण कार्य प्रगति पर है और अब तक 574 मानव दिवस का रोजगार सृजित हो चुका है। स्वयं हितग्राही को 36 दिवस का रोजगार मिला है, जिसके एवज में 9,360 रुपये की मजदूरी उनके खाते में सीधे भुगतान की गई है।

करीब 20×20×3 मीटर आकार की यह डबरी पूर्ण होने पर लगभग 894 घन मीटर जल संग्रहण क्षमता प्रदान करेगी। इससे मछली पालन, बाड़ी विकास और खेतों की सिंचाई के लिए स्थायी जल स्रोत उपलब्ध होगा। साथ ही भूजल स्तर में वृद्धि से आसपास के क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा।

मत्स्य पालन विभाग द्वारा अभिसरण के तहत मछली बीज, जाल, दवाइयां और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। डबरी के आसपास सब्जी उत्पादन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी, जिससे नजदीकी बाजार कुई में उत्पादों की बिक्री कर आय में निरंतर वृद्धि संभव होगी।

हितग्राही अंधरू बैगा ने बताया कि आजीविका डबरी से उन्हें स्थायी रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर मिलेगा। मनरेगा योजना से उनका भविष्य अब सुरक्षित और बेहतर दिखाई दे रहा है।

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